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मरुस्थल को रोकेगा अरावली ग्रीन वॉल प्रोजेक्ट

'अरावली ग्रीन वॉल प्रोजेक्ट': ड्रोन से बरसेंगी 1 लाख सीड बॉल्स, हरी होंगी अरावली की पहाड़ियां

राजस्थान में थार के बढ़ते रेगिस्तान को रोकने और अरावली पर्वतमाला को फिर से हरा भरा बनाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार ने संयुक्त रूप से अरावली ग्रीन वॉल प्रोजेक्ट शुरू किया है।

अरावली ग्रीन वॉल प्रोजेक्ट ड्रोन से बरसेंगी 1 लाख सीड बॉल्स हरी होंगी अरावली की पहाड़ियां

Drones to Drop Seed Balls to Stop Thar Desert Expansion in Rajasthan |

डीडवाना/कुचामन (राजस्थान)। राजस्थान में थार के बढ़ते रेगिस्तान को रोकने और अरावली पर्वतमाला को फिर से हरा भरा बनाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार ने संयुक्त रूप से "अरावली ग्रीन वॉल प्रोजेक्ट" शुरू किया है। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत राजस्थान के डीडवाना-कुचामन जिले सहित 19 जिलों में 28,500 हेक्टेयर क्षेत्र को विकसित किया जाएगा। परियोजना में डीडवाना-कुचामन जिले के परबतसर-कुचामन बेल्ट को विशेष फोकस एरिया बनाया गया है, क्योंकि अरावली की यही श्रृंखला मरुस्थल के विस्तार को रोकने में प्राकृतिक दीवार का काम करती है।

ड्रोन तकनीक से होगी अनोखी सीड बॉल बुवाई

योजना के तहत पहली बार अरावली की दुर्गम पहाड़ियों पर ड्रोन तकनीक से सीड बॉल्स बरसाई जाएंगी। इस अभियान के लिए कुचामन वन विभाग कार्यालय में एक लाख सीड बॉल्स तैयार की जा रही हैं। कुचामन वन विभाग कार्यालय में सीड बॉल्स के लिए चयनित पौधों के बीज पहुंच चुके हैं जिन्हें विशेष प्रोसेस से गुजारा जा रहा है इसके बाद सीड बॉल्स बनाई जाएगी।

स्वदेशी बीजों से तैयार होंगी सीड बॉल्स

विभाग ने इसके लिए खेजड़ी, कुमठा, खेर और रोझ जैसी स्वदेशी प्रजातियों के बीज एकत्रित कर लिए हैं। वन विभाग के अनुसार सीड बॉल्स को मिट्टी और जैविक खाद के विशेष मिश्रण से तैयार किया जाएगा। प्रत्येक सीड बॉल में 3 से 5 बीज रखे जाएंगे, ताकि कठिन परिस्थितियों में भी पौधों के अंकुरित होने की संभावना बनी रहे। मिट्टी का सुरक्षा कवच बीजों को पक्षियों, तेज धूप और अत्यधिक गर्मी से बचाने का काम करेगा।

कठिन इलाकों में पौधों के जीवित रहने की नई उम्मीद

कुचामन के फॉरेस्ट ऑफिसर राजू देवाल ने बताया कि ड्रोन तकनीक के जरिए इन सीड बॉल्स को पहाड़ियों की दरारों और ढलानों पर रणनीतिक तरीके से गिराया जाएगा। इससे उन क्षेत्रों तक भी पहुंच संभव होगी, जहां मानव पहुंचना बेहद कठिन है। विभाग का दावा है कि इस तकनीक से पथरीले इलाकों में पौधों के जीवित रहने की संभावना करीब 40 प्रतिशत तक बढ़ सकती है।

जल संरक्षण और मिट्टी बचाने पर भी जोर

यह योजना केवल पौधारोपण तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे पारिस्थितिक तंत्र को पुनर्जीवित करने का प्रयास है। पहाड़ियों पर वर्षा जल संरक्षण के लिए नाड़ियां बनाई जा रही हैं, जबकि मिट्टी के कटाव को रोकने के लिए विशेष एंटी-स्ट्रेचर तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे भूमि की नमी बनी रहेगी और पौधों के विकास के लिए अनुकूल वातावरण तैयार होगा।

अरावली को बताया गया राजस्थान की लाइफलाइन

कुचामन उपखंड अधिकारी विश्वामित्र मीणा ने बताया कि अरावली राजस्थान की लाइफलाइन है और इसे पुनर्जीवित करना समय की सबसे बड़ी जरूरत है। उन्होंने कहा कि पहले चरण में 10 लाख रुपए की लागत से सुरक्षा चक्र तैयार किया गया है। अगले दो वर्षों में कुचामन से परबतसर तक बड़े स्तर पर पौधारोपण कर सघन हरित क्षेत्र विकसित किया जाएगा, जो धूल भरी आंधियों और थार के बढ़ते रेगिस्तान को रोकने में अहम भूमिका निभाएगा।

पर्यावरण और जैव विविधता के लिए गेम चेंजर योजना

प्रशासन का मानना है कि अरावली ग्रीन वॉल प्रोजेक्ट भविष्य में राजस्थान के पर्यावरण और जैव विविधता के लिए गेम चेंजर साबित होगा। स्वदेशी प्रजातियों के पौधारोपण से वन्यजीवों को सुरक्षित आवास मिलेगा और क्षेत्र का पारिस्थितिक संतुलन मजबूत होगा।

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