चुनाव आयोग पश्चिम बंगाल में वोटरों की सुनवाई में विरोध और तोड़फोड़ व हिंसा की घटना नहीं थमने की स्थिति में विशेष गहन परीक्षण (एसआईआर) को स्थगित कर सकता है।
कोलकाता। चुनाव आयोग पश्चिम बंगाल में वोटरों की सुनवाई में विरोध और तोड़फोड़ व हिंसा की घटना नहीं थमने की स्थिति में विशेष गहन परीक्षण (एसआईआर) को स्थगित कर सकता है। राज्य मुख्य चुनाव अधिकारी ने इस आशय का पत्र सभी जिलाधिकारियों को पत्र लिखा है। इस पत्र के मद्देनजर भाजपा ने चुनाव आयोग पर राज्य सरकार के खिलाफ कार्रवाई करने पर जोर देना शुरू किया है।
TMC विधायक पर EC के खिलाफ आपत्तिजनक भाषण देने का आरोप
सूत्रों का कहना है कि चुनाव आयोग राज्य सरकार के अधिकारियें की ओर से उसके आदेशों पर अमल नहीं होने पर गंभीर है। मुर्शिदाबाद जिलें में फरक्का में वोटरों की सुनवाई के दौरान बीडीओ कार्यालय में तोड़फोड़ की घटना हुई थी और टीएमसी के विधाय़क मनिरूल इसलाम पर चुनाव आयोग के खिलाफ आपत्तिजनक भाषण देने का आरोप लगा था। चुनाव आयोग के निर्देश के मुताबिक मनिरूल इसलाम के खिलाफ जिला चुनाव अधिकारी द्वारा एफआईआर दर्ज नही कराई गई। फरक्का थाने की ओर से तर्क यह दिया गया कि किसी की ओर विधायक मनिरूल इसलाम का नाम लेकर शिकायत नहीं की है। वैसे अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है और छह लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
इटाहार में सुनवाई के दौरान BDO कार्यालय में हुई थी तोड़फोड़
सूत्रों का कहना है कि उत्तर दिनाजपुर जिले में इटाहार में वोटरों की सुनवाई के दैरान बीडीओ के कार्यालय में तोड़फोड़ की घटना हुई थी। टीएमसी के विधायक मोशरफ हुसैन पर वहां की घटना में हाथ होने का आरोप था और चुनाव आयोग ने जिला चुनाव अधिकारी को उनके खिलाफ भी एफआईआर दर्ज कराने का आदेश दिया था। लेकिन विधायक मोशरफ हुसैन के नाम की बजाय अज्ञात लोगों के नाम पर एफआईआर दर्ज हुआ। पिछले कुछ दिनों में फरक्का और इटाहार के आलावा कोलकाता के पड़ोसी जिले दक्षिण चौबीस परगना और हुगली, बाकुड़ा, उत्तर दिनाजपुर, मुर्शिदाबाद जिले समेत कई जिलों के विभिन्न जगहों में विरोध, तोड़फोड और टीएमसी व भाजपा के कार्यरर्ताओ की बीच झड़प की घटनाएं हुईं।
बाधाओं को रोकने के लिए पुलिस प्रशासन को दिए गए निर्देश
चुनाव आयोग की ओर से कानून व्यवस्था बनाए रखने और वोटरों की सुनवाई के कार्य में बाधाओं को रोकने के लिए पुलिस प्रशासन को निर्देश दिए गए। लेकिन उसके निर्देश का कोई संतोषजनक नतीजा नहीं निकला। चुनाव आयोग के निर्दैश के बावजूद राज्य के चार अधिकारियों के खिलाफ अफआईआर दर्ज नहीं होने का पहले का मामला अभी तक अनसुलझा पड़ा है।
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