नई दिल्ली। केन्द्र सरकार ने अमेरिका के साथ ट्रेड डील को अंतिम रूप देने के बाद निर्यात की रफ्तार देने के लिए...
नई दिल्ली। केन्द्र सरकार ने अमेरिका के साथ ट्रेड डील को अंतिम रूप देने के बाद निर्यात की रफ्तार देने के लिए सात उपायों की घोषणा की है। इनमें ई-कॉमर्स निर्यातकों के लिए 90% गारंटी के साथ ₹50 लाख तक ऋण सहायता और विदेशी गोदामों (Overseas Warehousing) के लिए सहयोग शामिल है।
केन्द्र सरकार ने वैश्विक व्यापार चुनौतियों और कई देशों में तनाव के बीच देश से निर्यात की रफ्तार बढ़ाने के लिए शुक्रवार को सात उपायों की घोषणा की है। इनमें ई-कॉमर्स निर्यातकों के लिए कर्ज सहायता और वैकल्पिक व्यापार साधनों को समर्थन शामिल है। ये उपाय 25,060 करोड़ रुपये के निर्यात प्रोत्साहन मिशन का हिस्सा हैं, जिसके 10 घटकों में से तीन जनवरी में पहले ही लागू हो चुके हैं।
केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा पिछले साल नवंबर में 45,000 करोड़ रुपये से अधिक के संयुक्त परिव्यय वाली दो योजनाओं को मंजूरी दी गई थी। इनमें निर्यात प्रोत्साहन मिशन (25,060 करोड़ रुपये) और ऋण गारंटी योजना (20,000 करोड़ रुपये) शामिल है। निर्यात संवर्धन मिशन (ईपीएम) दो एकीकृत उप-योजनाओं - निर्यात प्रोत्साहन (वित्तीय सहायक) और निर्यात दिशा (गैर-वित्तीय सहायक) के माध्यम से संचालित होता है, जो मिलकर वित्तीय और गैर-वित्तीय सहयोग प्रदान करती हैं।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि, निर्यात प्रोत्साहन मिशन के तहत किए गए उपाय भारत के बड़े आर्थिक बदलाव का हिस्सा हैं। इसका मकसद सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) को वैश्विक बाजारों की जरूरतों और मानकों के अनुसार मजबूत बनाना है। इन उपायों के जरिये वैश्विक व्यापार में भारत की स्थिति और मजबूत होगी। गोयल ने कहा, उन उपायों से उत्पादों की गुणवत्ता मानकों को बढ़ाकर और दुनियाभर में लॉजिस्टिक्स एवं वेयरहाउसिंग इन्फ्रा को बेहतर कर एमएसएमई के लिए प्रक्रियाओं को आसान बनाने में मदद मिलेगी। इस मिशन की घोषणा 2025-26 के बजट में हुई थी। इसका मकसद निर्यातकों के लिए नए बाजार एवं मौके उपलब्ध कराना है।
योजना के तहत डायरेक्ट ई-कॉमर्स क्रेडिट में छोटे निर्यातकों को 90 फीसदी गारंटी के साथ 50 लाख तक कर्ज मिलेगा। ओवरसीज इन्वेंट्री क्रेडिट सुविधा के तहत पांच करोड़ तक सहायता 75 फीसदी गारंटी कवरेज के साथ दी जाएगी। इस पर 2.75 फीसदी ब्याज छूट मिलेगी, जो सीमा सालाना अधिकतम 15 लाख है।
केन्द्र सरकार की योजना के अन्तर्गत निर्यातकों को फैसिलिटेटिंग लॉजिस्टिक्स, ओवरसीज वेयरहाउसिंग एंड फुलफिलमेंट (फ्लो) के तहत निर्यातकों को विदेशी वेयरहाउसिंग बुनियादी ढांचे तक पहुंच प्रदान की जाएगी। साथ ही इन इकाइयों को एमएसएमई भागीदारी मानदंडों के अनचरूप अधिकतम तीन वर्षों के लिए स्वीकृत परियोजना लागत की 30 फीसदी तक मदद दी जाएगी।
केन्द्र सरकार ने दिसंबर 2025 में, 4,531 करोड़ रुपये की बाजार पहुंच सहायता योजना शुरू की थी। इसी क्रम में जनवरी में, सरकार ने निर्यातकों की ऋण तक पहुंच में सुधार लाने के लिए 7,295 करोड़ रुपये के निर्यात समर्थन पैकेज की घोषणा की थी, जिसमें 5,181 करोड़ रुपये की ब्याज सब्सिडी योजना और 2,114 करोड़ रुपये की संपार्श्विक सहायता शामिल है। इन उपायों को छह वर्षों की अवधि (2025-31) में लागू किया जाएगा।
वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारी ने कहा, "हम अब ईपीएम के आठ घटकों को लागू करने पर काम कर रहे हैं। इसे अंतिम रूप दे दिया गया है। हम अगले सप्ताह इसके लागू होने की घोषणा करेंगे।" उन्होंने आगे बताया कि ये घटक ई-कॉमर्स, वेयरहाउसिंग और फैक्टरिंग सेवाओं जैसे मुद्दों पर आधारित होंगे।
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