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कोयंबटूर केस में ED की बड़ी छापेमारी

कोयंबटूर बम धमाका केस: आतंकी फंडिंग जांच में ED की 3 राज्यों में 16 ठिकानों पर छापेमारी

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गुरुवार को तमिलनाडु, महाराष्ट्र और तेलंगाना में 16 स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया।

कोयंबटूर बम धमाका केस आतंकी फंडिंग जांच में ed की 3 राज्यों में 16 ठिकानों पर छापेमारी

ED Raids 16 Locations in Coimbatore Blast Case Probe |

नई दिल्ली [भारत]: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गुरुवार को तमिलनाडु, महाराष्ट्र और तेलंगाना में 16 स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई 2022 में हुए कोयंबटूर बम विस्फोट की आतंकी फंडिंग से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के तहत की गई। एजेंसी का तलाशी अभियान सुबह से जारी है। ईडी के चेन्नई क्षेत्रीय कार्यालय ने तमिलनाडु के चेन्नई और कोयंबटूर, तेलंगाना के हैदराबाद तथा महाराष्ट्र के मुंबई में स्थित उन ठिकानों पर छापेमारी की, जिनका इस मामले से जुड़े संदिग्धों के संपर्क में होने का दावा किया गया है।

एफआईआर के आधार पर शुरू हुई जांच

ईडी की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) द्वारा दर्ज विभिन्न एफआईआर के आधार पर शुरू की गई थी। ये मामले 2022 में कोयंबटूर के संगमेश्वर मंदिर के पास हुए आत्मघाती कार बम विस्फोट से जुड़े हैं। जांच के अनुसार, यह हमला जमेशा मुबीन और उसके साथियों द्वारा आईएसआईएस से प्रेरित आतंकी साजिश के तहत संशोधित मारुति कार में विस्फोटक भरकर किया गया था।

फर्जी कोविड वैक्सीन सर्टिफिकेट से जुटाई गई फंडिंग

घटनाक्रम से परिचित अधिकारियों ने एएनआई को बताया कि आरोपियों ने आतंकी गतिविधियों के लिए धन जुटाने के दो प्रमुख तरीके अपनाए। पहला, कोविड-19 काल में फर्जी वैक्सीन प्रमाणपत्र घोटाले के जरिए धन इकट्ठा किया गया। दूसरा, दान और धोखाधड़ी के जरिए कोवाई अरबी कॉलेज में निवेश किया गया, जहां कथित तौर पर युवाओं के कट्टरपंथीकरण का काम किया जाता था। जांच में यह भी सामने आया कि बम विस्फोट मामले के 12 आरोपियों ने ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यम से कोवाई अरबी कॉलेज के सत्रों में भाग लिया था, जहां उन्हें सलाफी-जिहादी विचारधारा से प्रभावित किया गया।

चौथे पूरक आरोपपत्र में पांच और आरोपी शामिल

अप्रैल 2025 में एनआईए ने इस मामले में चौथा पूरक आरोपपत्र दाखिल करते हुए पांच और लोगों को आरोपी बनाया था। इनमें शेख हिदायतुल्ला, उमर फारूक, पावस रहमान, शरण मरियप्पन और अबू हनीफा के नाम शामिल हैं। एजेंसी ने इन पर आतंकी फंडिंग और हमले की साजिश में शामिल होने का आरोप लगाया था। आरोपपत्र के साथ इस मामले में कुल 17 आरोपी हो चुके हैं।

फर्जी सर्टिफिकेट से कमाए पैसे से खरीदी गई विस्फोटक सामग्री

एनआईए की चार्जशीट के अनुसार, शेख हिदायतुल्ला और उमर फारूक ने 2021-22 के दौरान फर्जी कोविड वैक्सीन प्रमाणपत्र घोटाले से जुटाई गई रकम का इस्तेमाल कार बम हमले के लिए विस्फोटक सामग्री और अन्य संसाधन खरीदने में किया था। इस कथित साजिश में पावस रहमान, शरण और अबू हनीफा की भी भूमिका बताई गई है।

आईएसआईएस से प्रेरित साजिश का दावा

एनआईए के अनुसार, आत्मघाती हमलावर जमेशा मुबीन ने संशोधित मारुति कार में वाहन-जनित तात्कालिक विस्फोटक उपकरण (VBIED) का इस्तेमाल किया था। हमले में उसकी मौत हो गई थी, इसलिए उसके खिलाफ आरोप समाप्त कर दिए गए। जांच एजेंसी का दावा है कि मुबीन ने आईएसआईएस के तत्कालीन स्वयंभू खलीफा के प्रति निष्ठा की शपथ ली थी। एनआईए के अनुसार, आरोपियों ने हमले की साजिश रचने के लिए विय्यूर हाई सिक्योरिटी जेल और सत्यमंगलम आरक्षित वन में कई बैठकें भी की थीं। उनका उद्देश्य अपने कथित नेता मोहम्मद अजहरुद्दीन की गिरफ्तारी का बदला लेना था।

(एएनआई)

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