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इम्पीरिया रियल एस्टेट पर ED का छापा

इम्पीरिया रियल एस्टेट फर्मों पर ED का शिकंजा, छापेमारी में 50.50 लाख नकद और लग्जरी कारें जब्त

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इम्पीरिया समूह की कंपनियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए दिल्ली में आठ ठिकानों पर छापेमारी की है।

इम्पीरिया रियल एस्टेट फर्मों पर ed का शिकंजा छापेमारी में 5050 लाख नकद और लग्जरी कारें जब्त

Real Estate Firms Face ED Probe |

नई दिल्ली: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इम्पीरिया समूह की कंपनियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए दिल्ली में आठ ठिकानों पर छापेमारी की है। इस दौरान एजेंसी ने 50.50 लाख रुपये नकद, तीन लग्जरी वाहनों समेत कई डिजिटल उपकरण और आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त किए हैं।

8 परिसरों पर हुई तलाशी

ईडी के गुरुग्राम क्षेत्रीय कार्यालय ने 29 जुलाई को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत इम्पीरिया विशफील्ड प्राइवेट लिमिटेड (IWPL), इम्पीरिया स्ट्रक्चर्स लिमिटेड (ISL), उनके प्रमोटर निदेशकों और वर्तमान रेजोल्यूशन प्रोफेशनल से जुड़े आवासीय और व्यावसायिक परिसरों पर तलाशी अभियान चलाया।

दस्तावेज और डिजिटल डाटा बरामद

जांच के दौरान एजेंसी को संपत्ति दस्तावेज, ऑडिट किए गए वित्तीय विवरण, टैली डेटा, कथित धन गबन से जुड़े रिकॉर्ड और खरीदारों द्वारा निवेश की गई राशि से संबंधित दस्तावेज मिले हैं। ईडी ने ISL, IWPL और उनके प्रमोटर निदेशकों हरप्रीत सिंह बत्रा, ब्रजिंदर सिंह बत्रा, प्रदीप शर्मा, अविनाश सेतिया समेत अन्य के खिलाफ PMLA के तहत मामला दर्ज किया है। एजेंसी ने हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा दर्ज कई FIR के आधार पर जांच शुरू की है। इन मामलों में रियल एस्टेट परियोजनाओं को पूरा न करने, निवेशकों को झूठे वादे देने, सुनिश्चित रिटर्न और लीज किराया नहीं देने तथा धन के कथित दुरुपयोग के आरोप लगाए गए हैं।

खरीदारों के पैसे के इस्तेमाल पर सवाल

ईडी के अनुसार, जांच में सामने आया कि इम्पीरिया विशफील्ड प्राइवेट लिमिटेड ने गुरुग्राम सेक्टर-37 स्थित एल्वेडोर परियोजना के खरीदारों से मिले धन का इस्तेमाल कथित तौर पर अपनी अन्य देनदारियों को पूरा करने के लिए किया। एजेंसी ने आरोप लगाया कि कंपनी ने खरीदारों से मिले निवेश को संबंधित और सहयोगी संस्थाओं व व्यक्तियों को ऋण और अग्रिम राशि के रूप में दिया।

15 साल बाद भी नहीं मिला कब्जा

ईडी ने कहा कि IWPL ने वर्ष 2011 से खरीदारों से बुकिंग लेना शुरू किया था, लेकिन करीब 15 साल बाद भी कई खरीदारों को उनकी यूनिट का कब्जा नहीं मिल पाया है। वहीं, इम्पीरिया स्ट्रक्चर्स लिमिटेड पर भी गुरुग्राम के इम्पीरिया माइंडस्पेस और ग्रेटर नोएडा के इम्पीरिया बिजनेस पार्क प्रोजेक्ट में खरीदारों से बुकिंग राशि लेने और वादे पूरे नहीं करने के आरोप हैं।

63 करोड़ रुपये की राशि जांच के दायरे में

ईडी ने बताया कि अब तक की जांच में सामने आया है कि IWPL ने एल्वेडोर परियोजना के खरीदारों से करीब 63 करोड़ रुपये एकत्र किए थे। अन्य परियोजनाओं से जुड़े अपराध की आय का आकलन अभी जारी है। फिलहाल, एल्वेडोर परियोजना के समाधान की प्रक्रिया चल रही है और ईडी मामले की आगे जांच कर रही है।

(एएनआई)

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