कोरबा में भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी के खिलाफ जनप्रतिनिधियों का आक्रोश फूट पड़ा। जनप्रतिनिधियों ने जनपद पंचायत कार्यालय में ताला जड़ दिया। जिससे अधिकारी और कर्मचारी कार्यालय में ही बंधक बन गए।
कोरबा (छत्तीसगढ़): जिले से इस वक्त की सबसे बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है। जनपद पंचायत पोड़ी उपरोड़ा में सुबह से चल रहा जनप्रतिनिधियों का आक्रोश उग्र आंदोलन में बदल चुका है। भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी के खिलाफ धरने पर बैठे नाराज जनपद सदस्यों ने बड़ा कदम उठाते हुए जनपद पंचायत कार्यालय के मुख्य द्वार पर ताला जड़ दिया है।
दफ्तर में ही बंधक बने अधिकारी और कर्मचारी
तालाबंदी की वजह से जनपद सीईओ (CEO) समेत कार्यालय के तमाम अधिकारी और कर्मचारी दफ्तर के अंदर ही बंधक बन गए। सरकारी दफ्तर के मुख्य द्वार पर जनप्रतिनिधियों के ताला बंद करने की घटना के बाद जिला प्रशासन और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।
सुबह से चल रहा था विवाद, दोपहर में फूटा गुस्सा
आज जनपद पंचायत पोड़ी उपरोड़ा में सामान्य सभा की बैठक बुलाई गई थी। लेकिन, स्थानीय अधिकारियों पर निर्माण कार्यों की जानकारी और आईडी छिपाने का आरोप लगाते हुए सभी जनपद सदस्यों ने एकजुट होकर बैठक का सामूहिक बहिष्कार कर दिया था। इसके बाद सभी सदस्य मुख्य द्वार के सामने ही टेंट लगाकर धरने पर बैठ गए थे और लगातार लाउडस्पीकर के जरिए स्थानीय प्रशासन में चल रहे भ्रष्टाचार की पोल खोल रहे थे।

अधिकारियों की 'तानाशाही' पर भारी पड़ा जनप्रतिनिधियों का आक्रोश
धरने पर बैठे सदस्यों का आरोप था कि स्थानीय जनपद सीईओ और अधिकारियों का रवैया बेहद तानाशाही पूर्ण है। वे सरकार की पारदर्शिता की नीति को ठेंगा दिखा रहे हैं। जब लंबे समय तक धरने पर बैठने के बावजूद प्रशासन का कोई वरिष्ठ अधिकारी उनकी सुध लेने नहीं पहुंचा, तो जनप्रतिनिधियों का गुस्सा फूट पड़ा। सभी सदस्यों ने एकजुट होकर 'भ्रष्टाचार बंद करो' और 'प्रशासन होश में आओ' के नारे लगाते हुए सीधे मुख्य दरवाजे पर ताला जड़ दिया।
मौके पर तनाव, पुलिस और प्रशासन की टीम रवाना
सरकारी दफ्तर में तालाबंदी और जनपद सीईओ समेत कर्मचारियों के अंदर बंद होने की सूचना मिलते ही जिला मुख्यालय में खलबली मच गई। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मौके पर पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारियों की टीम रवाना कर दी गई है। नाराज जनप्रतिनिधि अब भी दफ्तर के बाहर डटे हुए हैं। उनका कहना है कि जब तक उच्च अधिकारी मौके पर आकर भ्रष्टाचार की जांच का लिखित आश्वासन नहीं देते, तब तक ताला नहीं खोला जाएगा।