आखिर में चुनाव आयोग को बीएलओ के विरोध को देखते हुए कदम पीछे करना पड़ा। बीएलओ को अब वोटरों की तस्वीरों और दस्तावेजों का सत्यापन नहीं करना पड़ेगा।
कोलकाता। आखिर में चुनाव आयोग को बीएलओ के विरोध को देखते हुए कदम पीछे करना पड़ा। बीएलओ को अब वोटरों की तस्वीरों और दस्तावेजों का सत्यापन नहीं करना पड़ेगा। चुनाव आयोग ने बीएलओ द्वारा गणना फॉर्म और उसे डाटा एंट्री करने के काम दिए गए समय में पूरा करने के बाद भी उन्हें एकाएक वोटरों की तस्वीरों और दस्तावेजों के सत्यापन का काम सौंप दिया था। बीएलओ ने कोलकाता समेत राज्य के तमाम हिस्सों में इसका विरोध किया था। वोटरों के तस्वीरों और दस्तावेजों के सत्यापन के काम से बीएलओ के साथ दुर्व्यवहार और हमला होने की संभावना बढ़ गई थी। इस पर राज्यपाल सी वी आनंद बोस ने भी चिंता जताई थी।
चुनाव आयोग ने FIR दर्ज करने का दिया आदेश
बीएलओ अपने साथ हो रहे दुर्व्यवहार और हमले की घटनाओं से डरे हुए और आतंकित हैं। उन्होंने चुनाव आयोग से अपनी सुरक्षा की मांग करते रहे हैं। इस मांग को लेकर राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी के कार्यालय के सामने बीएलओ की ओर से कई बार विरोध-प्रदर्शन भी किया गया। बीएलओ के साथ हो रहे दुर्व्यवहार और हमले की घटना को चुनाव आयोग ने गंभीरता से लिया है और उसने सभी जिला चुनाव अधिकारियों को आदेश दिया है कि बीएलओ से साथ दुर्व्यवहार और हमले की घटना होने पर वे तत्काल एफआईआर दर्ज करें और पुलिस अधिकारियों को कार्रवाई करने का आदेश दें।
बीएलओ से दुर्व्यवहार के बाद जागी चुनाव आयोग
सूत्रों के अनुसार राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी मनोज अग्रवाल ने पुलिस महानिदेशक को पत्र लिख कर बीएलओ की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने का अनुरोध किया था। लेकिन उनके पत्र का कोई नतीजा नहीं हुआ। चुनाव आयोग भी मौन था। लेकिन जब उत्तर चौबीस परगना जिले के फलता मे महिलाओं द्वारा चुनाव आयोग द्वारा भेजे के गए विशेष पर्यवेक्षक सी गुरुगन के साथ दुर्व्यवहार किया गया तब चुनाव आयोग को बीएलओ और चुनाव अधिकारियो को सुरक्षा की फिक्र हुई।
यह भी पढ़ें: https://www.primenewsnetwork.in/state/political-battle-between-bjp-and-tmc-has-intensified-over-salt-lake-stadium-inci/101158
सॉल्ट लेक स्टेडियम की घटना को लेकर BJP-TMC में सियासी घमासान हुआ तेज