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करंट ने छीना परिवार का इकलौता सहारा

मंडला में करंट लगने से युवक की मौत, बिजली विभाग पर लापरवाही का आरोप

मंडला जिले के बम्हनी बंजर थाना क्षेत्र के जहरमऊ गांव में बिजली विभाग की कथित लापरवाही एक परिवार पर ऐसा कहर बनकर टूटी कि घर का इकलौता सहारा हमेशा के लिए छिन गया।

मंडला में करंट लगने से युवक की मौत बिजली विभाग पर लापरवाही का आरोप

Electric Shock Kills Youth in Mandla, Villagers Protest |

मंडला (मध्यप्रदेश)। मंडला जिले के बम्हनी बंजर थाना क्षेत्र के जहरमऊ गांव में बिजली विभाग की कथित लापरवाही एक परिवार पर ऐसा कहर बनकर टूटी कि घर का इकलौता सहारा हमेशा के लिए छिन गया। बिजली के पोल में दौड़ रहे करंट की चपेट में आने से एक युवक की दर्दनाक मौत हो गई। घटना के बाद गांव में शोक और आक्रोश का माहौल है। न्याय और मुआवजे की मांग को लेकर ग्रामीणों ने मंडला-सिवनी मार्ग पर चक्काजाम कर विरोध प्रदर्शन किया।

नल के पास करंट की चपेट में आया युवक

ग्रामीणों के अनुसार सुबह युवक अक्षय यादव घर के पास नल में सटक लगाने पहुंचा था। इसी दौरान उसका हाथ बिजली के पोल से छू गया। पोल में करंट प्रवाहित होने के कारण वह मौके पर ही गिर पड़ा। गंभीर हालत में उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव के कई बिजली पोलों में करंट आने की शिकायत पहले भी बिजली विभाग को दी गई थी, लेकिन समय रहते सुधार कार्य नहीं किया गया।

परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़, गांव में आक्रोश

ग्रामीणों का कहना है कि यदि विभाग ने शिकायतों को गंभीरता से लिया होता तो आज अक्षय यादव जीवित होता। अक्षय अपने पीछे वृद्ध मां, पत्नी और दो छोटे बच्चों को छोड़ गया है, जबकि उसकी पत्नी गर्भवती भी है। परिवार पर टूटे इस दुख के पहाड़ ने पूरे गांव को झकझोर कर रख दिया है। इसी पीड़ा और आक्रोश के बीच ग्रामीण सड़क पर उतर आए और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग करने लगे।

मुआवजे को लेकर प्रशासन और ग्रामीणों में विवाद

वहीं ऊर्जा विभाग के कार्यपालन अभियंता ने घटना पर दुख व्यक्त करते हुए बताया कि बिजली पोल में करंट आने से युवक की मृत्यु हुई है। विभाग की ओर से तत्काल चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता और मृतक की पत्नी को आउटसोर्स कर्मचारी के रूप में रोजगार देने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। हालांकि ग्रामीण और परिजन 50 लाख रुपये के मुआवजे की मांग पर अड़े हैं। विभाग का कहना है कि वर्तमान नियमों के तहत चार लाख रुपये से अधिक सहायता का प्रावधान नहीं है, लेकिन उच्च स्तर पर पत्राचार कर मामले को शासन तक पहुंचाया जाएगा।

ग्रामीणों का चक्काजाम, न्याय की मांग तेज

एक लापरवाही ने एक परिवार की खुशियां छीन लीं। अब सवाल यह है कि शिकायतों के बावजूद यदि समय रहते कार्रवाई होती, तो क्या अक्षय यादव की जान बच सकती थी? फिलहाल पूरा गांव न्याय की मांग कर रहा है और प्रशासन की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहा है।

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