लखनऊ। उत्तर प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड बिजली मीटर का रीचार्ज होने के बावजूद समय से बिजली बहाल...
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड बिजली मीटर का रीचार्ज होने के बावजूद समय से बिजली बहाल नहीं होने की शिकायतों पर विद्युत नियामक आयोग ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है। आयोग ने पावर कॉरपोरेशन (UPPCL) को नोटिस जारी कर 1 लाख रुपये प्रतिदिन का जुर्माना लगाने की चेतावनी दी है और 15 दिनों में जवाब मांगा है।
राज्य नियामक आयोग के अनुसार, रिचार्ज के 2 घंटे के भीतर बिजली कनेक्शन जुड़ जाना चाहिए और आपूर्ति बहाल हो जानी चाहिए। पर सामान्यतया ऐसा होता नहीं है। यूपी पावर कॉरपोरेशन ने खुद ही स्वीकार किया है कि 1.93 लाख से अधिक उपभोक्ताओं के कनेक्शन नेगेटिव बैलेंस के कारण कटे और रीचार्ज के बावजूद समय पर बहाल नहीं हुए।
अब नियामक आयोग ने स्मार्ट प्रीपेड मीटर उपभोक्ताओं को रिचार्ज के दो घंटे के अंदर बिजली नहीं मिलने को लेकर कड़ा रूख अख्तियार करते हुए पॉवर कॉर्पोरेशन से पूछा है कि क्यों न हर दिन के हिसाब से एक लाख रुपये जुर्माना लगाया जाए ? आयोग ने कार्पोरेशन को नोटिस जारी कर पक्ष रखने के लिए 15 दिन का समय दिया है।
पॉवर कॉर्पोरेशन ने 17 अप्रैल को नियामक आयोग में दाखिल किए अपने जवाब में कहा था कि 1.93 लाख उपभोक्ताओं का कनेक्शन दो घंटे के अंदर नहीं जुड़ा है। इस पर नियामक आयोग के अध्यक्ष अरविंद कुमार और सदस्य संजय कुमार सिंह ने बृहस्पतिवार को कहा कि क्यों न रिचार्ज के बाद भी कनेक्शन नहीं जुड़ने के मामले में हर दिन एक लाख रुपये के हिसाब से जुर्माना लगाया जाए?
उधर, उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता. परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष अरविंद कुमार से मुलाकात कर प्रीपेड मीटर का विरोध किया है। इसमबीच उपभोक्ताओं की शिकायतों के बढ़ते दबाव के बाद सरकार ने स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने की प्रक्रिया पर फिलहाल रोक लगा दी है और 4 सदस्यीय तकनीकी समिति से इसकी जांच (10 दिनों के भीतर) कराने का निर्देश दिया है। साथ ही अब प्रीपेड बैलेंस शून्य होने पर बिजली तुरंत नहीं कटेगी और उपभोक्ताओं को रिचार्ज के लिए कुछ समय की मोहलत (ग्रेस पीरियड) दी जाएगी।
प्राप्त जानकारी के अनुसार विद्युत नियामक आयोग (स्टैंडर्ड्स ऑफ परफॉर्मेंस) विनियम, 2019 के अनुसार, रिचार्ज/भुगतान के 2 घंटे के भीतर बिजली आपूर्ति बहाल करना अनिवार्य है। यह कार्य कम से कम 95% मामलों में होना चाहिए। कॉर्पोरेशन से मिले जवाब में 13, 14, 16, 17, 18, 23, 25 और 28 मार्च एवं 2 और 7 अप्रैल को नियमों का उल्लंघन पाया गया। यानी कुल 10 दिन हुए उल्लंघन के हिसाब से जुर्माना लगा तो कॉर्पोरेशन को 10 लाख रुपये चुकाने पड़ेंगे।
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