बांदा में उत्तर प्रदेश विद्युत विभाग के संविदा और आउटसोर्सिंग कर्मचारियों की अधिकतम सेवा आयु 60 वर्ष से घटाकर 55 वर्ष किए जाने के फैसले का विरोध तेज हो गया है।
उत्तर प्रदेश: बांदा में उत्तर प्रदेश विद्युत विभाग के संविदा और आउटसोर्सिंग कर्मचारियों की अधिकतम सेवा आयु 60 वर्ष से घटाकर 55 वर्ष किए जाने के फैसले का विरोध तेज हो गया है। शुक्रवार को जिले के पूर्व सैनिकों ने मुख्यमंत्री के नाम जिलाधिकारी के माध्यम से ज्ञापन सौंपकर इस आदेश को तत्काल वापस लेने की मांग की। पूर्व सैनिकों ने सरकार के इस फैसले को उनके रोजगार और परिवार की आजीविका पर सीधा असर डालने वाला बताते हुए नाराजगी जताई।
पूर्व सैनिकों ने बताया आर्थिक संकट का खतरा
पूर्व सैनिकों का कहना है कि भारतीय सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद बड़ी संख्या में सैनिक विद्युत विभाग में संविदा और आउटसोर्सिंग के माध्यम से सेवाएं दे रहे हैं। सेना से कम उम्र में रिटायरमेंट के बाद यही नौकरी उनके परिवार के भरण-पोषण का मुख्य सहारा बनती है। उनका कहना है कि सेवा आयु में पांच साल की कटौती से उनके सामने आर्थिक और सामाजिक संकट खड़ा हो जाएगा।
हजारों कर्मचारियों पर पड़ेगा असर
ज्ञापन में कहा गया कि सरकार के इस निर्णय से प्रदेशभर के हजारों पूर्व सैनिक और कर्मचारी प्रभावित होंगे। कई कर्मचारी लंबे समय से विद्युत विभाग में पूरी ईमानदारी और निष्ठा से काम कर रहे हैं। अचानक सेवा आयु कम होने से वे समय से पहले बेरोजगार हो जाएंगे, जिससे बच्चों की पढ़ाई, परिवार का खर्च और भविष्य की योजनाएं प्रभावित होंगी।
पूर्व सैनिकों ने सरकार से की पुनर्विचार की मांग
पूर्व सैनिकों ने कहा कि देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले जवानों ने अपना महत्वपूर्ण समय राष्ट्र सेवा में लगाया है। सेवानिवृत्ति के बाद सरकार की ओर से मिले रोजगार के अवसर उनके सम्मानजनक जीवन का आधार हैं। उन्होंने कहा कि सेवा आयु घटाने का फैसला उनके मनोबल को कमजोर करने वाला है। सरकार को पूर्व सैनिकों के हितों को ध्यान में रखते हुए इस आदेश पर दोबारा विचार करना चाहिए।
60 वर्ष तक सेवा जारी रखने की मांग
ज्ञापन के माध्यम से मुख्यमंत्री से मांग की गई कि विद्युत विभाग में संविदा एवं आउटसोर्सिंग कर्मचारियों की सेवा आयु पहले की तरह 60 वर्ष ही रखी जाए। साथ ही पूर्व सैनिक संगठनों और प्रतिनिधियों से बातचीत कर उनकी समस्याओं का समाधान निकालने की अपील की गई, ताकि किसी भी कर्मचारी के सामने रोजगार का संकट पैदा न हो।
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