केंद्र सरकार ने त्वरित विशेष न्यायालय (एफटीएससी) योजना को अस्थायी रूप से 30 सितंबर 2026 तक बढ़ा दिया है।
नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने त्वरित विशेष न्यायालय (एफटीएससी) योजना को अस्थायी रूप से 30 सितंबर 2026 तक बढ़ा दिया है। विधि एवं न्याय मंत्रालय के अनुसार, 30 अप्रैल 2026 तक देश के 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 775 फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट कार्यरत हैं, जिनमें 398 विशेष POCSO (ई-पीओसीएसओ) कोर्ट शामिल हैं।
2019 में शुरू हुई थी योजना
बलात्कार और POCSO अधिनियम, 2012 के तहत लंबित मामलों के त्वरित निपटारे के लिए यह केंद्र प्रायोजित योजना अक्टूबर 2019 में शुरू की गई थी। इससे पहले इस योजना को दो बार बढ़ाया जा चुका है और अब इसे 30 सितंबर 2026 तक बढ़ाया गया है।
2023 से 2025 तक कितने मामलों का निपटारा हुआ
उच्च न्यायालयों से प्राप्त जानकारी के अनुसार:
- 2023: 81,471 नए मामले दर्ज, 76,319 मामलों का निपटारा, 2,02,175 मामले लंबित।
- 2024: 88,902 नए मामले दर्ज, 85,595 मामलों का निपटारा, 2,04,122 मामले लंबित।
- 2025: 1,43,936 नए मामले दर्ज, 66,500 मामलों का निपटारा, 2,45,579 मामले लंबित रहे।
योजना पर अब तक ₹1,259.51 करोड़ जारी
मंत्रालय के अनुसार, एफटीएससी योजना के तहत धनराशि केंद्र प्रायोजित योजना के पैटर्न पर जारी की जाती है, जिसमें केंद्र और राज्यों की हिस्सेदारी 60:40 तथा विशेष श्रेणी के राज्यों के लिए 90:10 है। प्रत्येक कोर्ट में एक न्यायिक अधिकारी, सात सहायक कर्मचारियों के वेतन और अन्य दैनिक खर्चों के लिए अनुदान दिया जाता है। योजना शुरू होने के बाद से अब तक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को ₹1,259.51 करोड़ जारी किए जा चुके हैं।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से होती है नियमित समीक्षा
विधि मंत्रालय ने बताया कि एफटीएससी के कामकाज की नियमित समीक्षा राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और उच्च न्यायालयों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से की जाती है। केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने मुख्यमंत्रियों और उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों को पत्र लिखकर POCSO अधिनियम और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 के तहत मामलों में तय समय-सीमा का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने का आग्रह किया है।
अदालतों के बुनियादी ढांचे पर भी जोर
मंत्रालय ने बताया कि जिला और अधीनस्थ न्यायालयों के बुनियादी ढांचे के विकास के लिए केंद्र सरकार 1993-94 से राज्यों को वित्तीय सहायता दे रही है। वर्तमान योजना के तहत न्यायालय भवन, आवासीय इकाइयां, वकीलों के आवास, शौचालय परिसर और डिजिटल कंप्यूटर कक्ष के निर्माण के लिए सहायता दी जाती है। वित्त आयोग के 15वें चक्र के दौरान न्यायपालिका के बुनियादी ढांचे के विकास के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को ₹4,519.47 करोड़ की वित्तीय सहायता प्रदान की गई है।
(एएनआई)
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