प्राइम न्यूज़ – एक कसम, राष्ट्र प्रथम
Breaking News

7 दिन बाद भी नहीं घुली खाद

7 दिन बाद भी नहीं घुली खाद! किसानों ने खोली कृषि सेवा केंद्र की पोल

मध्यप्रदेश में किसानों ने आरोप लगाया कि खरीदी गई खाद 7 दिन बाद भी नहीं घुली, जिसके बाद उन्होंने कृषि सेवा केंद्र की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।

7 दिन बाद भी नहीं घुली खाद किसानों ने खोली कृषि सेवा केंद्र की पोल

Fertilizer Fails to Dissolve Even After 7 Days, Farmers Expose Agri Service Centre |

शाजापुर,(मध्यप्रदेश)। जिले में अकोदिया क्षेत्र के ग्राम केथलाय एवं छिलोचा के किसानों ने कृषि उपज मंडी गेट के सामने स्थित यादव कृषि सेवा केंद्र पर घटिया एवं संदिग्ध गुणवत्ता की खाद बेचने का आरोप लगाया है। किसानों ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग की है।

7 दिन बाद भी नही घुल रही खाद

किसानों का कहना है, कि सोयाबीन की बुवाई के बाद 7 दिन बीत चुके हैं और फसल का अंकुरण भी हो गया है, लेकिन खेत में डाली गई खाद अभी तक नहीं घुली है। किसानों के मुताबिक सामान्यतः डीएपी एवं अन्य फॉस्फेटयुक्त खाद नमी मिलने के बाद शीघ्र घुलकर फसल को पोषक तत्व उपलब्ध कराती है, जबकि इस खाद में ऐसा नहीं हो रहा है। किसान रतनलाल मालवीय, बाबूलाल एवं विनोद ने बताया, कि उन्होंने 14 जून को डीएपी खाद खरीदने के लिए यादव कृषि सेवा केंद्र से संपर्क किया था। किसानों के अनुसार दुकानदार राहुल यादव ने उन्हें डीएपी के स्थान पर “भारतीय जन उर्वरक सुप्रीम बलवान 12:32:06” खाद देते हुए दावा किया कि यह डीएपी से भी बेहतर है। किसानों ने उक्त खाद 1500 रुपए प्रति बोरी की दर से खरीदी।

किसानों को बेची गई नकली अथवा निम्न गुणवत्ता की खाद

किसान विनोद ने बताया, कि उन्होंने खाद को अलग से पानी में डालकर भी देखा, लेकिन वह नहीं घुली। इससे किसानों में आशंका बढ़ गई है कि उन्हें नकली अथवा निम्न गुणवत्ता की खाद बेची गई है। किसानों का आरोप है, कि शिकायत करने पर दुकानदार राहुल यादव ने समस्या का समाधान करने के बजाय अभद्र व्यवहार किया और धमकाने लगा। बाद में कंपनी की ओर से सेल्स ऑफिसर दुर्गा प्रसाद मालवीय खेत पर पहुंचे।

खाद नही घुलने से परेशान हैं किसान

किसानों के अनुसार उन्होंने भी खाद के नहीं घुलने की स्थिति देखी। इसके बाद दुकानदार ने किसानों से कहा, कि कंपनी से चर्चा हो चुकी है और खाद का वास्तविक परिणाम 15 से 17 दिन बाद दिखाई देगा। मामले को लेकर किसानों ने टप्पा कार्यालय अकोदिया पहुंचकर नायब तहसीलदार कन्हैयालाल चौहान को लिखित आवेदन सौंपा। किसानों ने खाद के नमूनों की जांच कराने, संबंधित दुकान के स्टॉक की जांच करने तथा दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। नायब तहसीलदार ने किसानों को निष्पक्ष जांच कर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

किसानों की मेहनत, फसल उत्पादन और आर्थिक स्थिति पर पड़ेगा गंभीर असर

आपको बता दे, कि किसानों ने जब खाद लिया उसे समय दुकानदार ने बिल नहीं दिया था। किसान के द्वारा 30 जून को किसान के द्वारा मांगने पर बिल दिया गया। क्षेत्र के किसानों का कहना है, कि यदि बाजार में नकली अथवा घटिया गुणवत्ता की खाद की बिक्री पर समय रहते रोक नहीं लगाई गई तो किसानों की मेहनत, फसल उत्पादन और आर्थिक स्थिति पर गंभीर असर पड़ेगा।

खाद के नमूने की तत्काल की जाए जांच

किसानों ने प्रशासन से मांग की है, कि कृषि विभाग, उर्वरक निरीक्षक एवं संबंधित अधिकारियों की संयुक्त टीम बनाकर खाद के नमूने तत्काल जांच के लिए भेजे जाएं, दोषियों के लाइसेंस निरस्त किए जाएं तथा किसानों को हुए नुकसान की भरपाई सुनिश्चित की जाए। किसानों ने कहा, कि खरीफ सीजन के दौरान उर्वरकों की गुणवत्ता पर विशेष निगरानी रखना आवश्यक है, ताकि कोई भी व्यापारी किसानों को भ्रमित कर संदिग्ध या नकली खाद बेचकर उनकी मेहनत और भविष्य के साथ खिलवाड़ न कर सके।

यह भी पढ़ेंः पानी के गड्ढे में डूबने से दो मासूम चचेरे भाइयों की दर्दनाक मौत, गांव में पसरा मातम

Related to this topic: