Ballia : जिले के गंगा-सरयू के दोआब क्षेत्र यानी दोआबा में हर साल ये दोनों नदियां बरसात के मौसम में हर साल तबाही लेकर आतीं हैं। बाढ़ के कारण सैकड़ों एकड़ उपजाऊ जमीन नदियों में समा जाती है।
बलिया के दोआब क्षेत्र में हर साल पचासों मकान नदी में समा रहे.. |
Ballia : जिले के गंगा-सरयू के दोआब क्षेत्र यानी दोआबा में हर साल ये दोनों नदियां बरसात के मौसम में हर साल तबाही लेकर आतीं हैं। बाढ़ के कारण सैकड़ों एकड़ उपजाऊ जमीन नदियों में समा जाती है। साथ में हजारों एकड़ की फसल बर्बाद हो जाती है। बलिया-बैरिया बांध पर हर वर्ष खतरा मंडराने लगता है। इसी बंधे पर एनएच 31 भी है। इस खतरे का अंदाजा जहां तहां बाढ़ के कारण बंधे के किनारे की कटान से लगाया जा सकता है। दूसरी तरफ बाढ़ और कटान पीडितों को आसपास के सुरक्षित स्थानों पर शरण लेनी पड़ती है।
इस बार बिहार की सीमा से सटे चक्की नौरंगा गांव में इस बार गंगा ने भीषण मचाई। गंगा की आई चार बार की बाढ़ में करीब 134 मकान नदी में विलीन हो चुके हैं। यही नहीं सैकड़ों एकड़ जमीन भी गंगा में समा गई है। पीड़ित परिवार अपने सामने घर मकान और जमीन को तबाह होते देखते रह गए। अब शेष बचे गांव को बचाने के लिए शासन की कार्रवाई चल रही है। बाढ़ खंड के अधिशासी अभियंता संजय कुमार मिश्र के नेतृत्व में टीम ड्रोन कैमरों चक्की नौरंगा गांव की कटान का सर्वे कर चुकी है। उनके साथ बिहार के अधिकारी भी थे।
सर्वे में यह जानने का प्रयास किया गया कि आखिर नदी किस दिशा में किस रफ्तार कटान कर रही है। कटान को रोकने के लिए क्या किया जा है। परामर्श के बाद दोनों प्रांतों के अधिकारियों का मानना था कि कटान की स्थिति गंभीर है। रोकने के लिए जल्द ही ठोस कार्ययोजना शासन को भेजी जाएगी। शासन की मंजूरी के बाद कटानरोधी कार्य युद्धस्तर पर शुरू कर दिया जाएगा। प्रयास होगा कि बचाव कार्य को समय से पहले पूरा कर लिया जाएगा।
गांव के लोगों में कटानरोधी कार्यों में भ्रष्टाचार
उधर, दोआबा क्षेत्र के उत्तर में सरयू नदी गोपालनगर टांड़ी और सिवाल गांव में कई साल से कटान कर रही है। कई मकानों के कटने के अलावा उपजाऊ जमीन भी सरयू में समा गई है। कई परिवारों को सुरेमनपुर पुरानी रेल लाइन और आसपास के सुरक्षित स्थानों पर शरण लेनी पड़ी है। गोपालनगर टांड़ी में अब तक 22 लोगों के मकान सरयू नदी में समा चुके हैं। अब जिनके मकान कटान के करीब हैं, वे अपने ही हाथों से उजाड़ने में लगे हैं। लोगों का कहना है कि नदी का कोई भरोसा नहीं। फिर कब अचानक कटान शुरू हो जाए। गांव के लगभग दो तिहाई मकान सरयू नदी में विलीन हो चुके हैं, जो घर बचे हैं उसको भी लोग उजाड़ रहे हैं।
गांव के लोगों में कटानरोधी कार्यों में भ्रष्टाचार को लेकर रोष है। उनका आरोप है कि अगर मानक के अनुसार कटान रोधी कार्य हुए होते तो निश्चित रूप से गांव में कटान इस साल नहीं होती। पीड़ितों को मुआवजा देने के लिए तहसील प्रशासन की ओर से पहल नहीं की जा रही है। इन सब मुद्दों को लेकर लोगों ने अधिशासी अभियंता बाढ़ खंड संजय मिश्र से गुस्से का इजहार किया। इसके बाद माहौल तल्ख हो गया। बात बढ़ती देख अधिकारी लौट गए। उधर, सरयू की धारा से सिवाल मठिया गांव के सामने भी कटान तेज रहा। उपजाऊ जमीन को सरयू नदी में समाती जा रही है। शिवाल मठिया के ग्राम प्रधान परमात्मा गोंड़ के अनुसार यदि कटान की स्थिति यही रही तो बस्ती को गंभीर खतरा उत्पन्न हो जाएगा। उन्होंने प्रशासन से राहत और बचाव की मांग की है।
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