भोपाल। मप्र की राजधानी की जीवनरेखा कहे जाने वाले बड़े तालाब को अतिक्रमण से मुक्त कराने की कवायद तेज हो गई है...
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भोपाल। मप्र की राजधानी की जीवनरेखा कहे जाने वाले बड़े तालाब को अतिक्रमण से मुक्त कराने की कवायद तेज हो गई है। प्रशासन की ओर से फुल टैंक लेवल (एफटीएल) और उससे 50 मीटर के प्रतिबंधित दायरे का सीमांकन शुरू करते ही चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। अब तक 50 से अधिक अवैध निर्माण चिन्हित किए जा चुके हैं। इनमें आलीशान बंगले, रिसॉर्ट, मैरिज गार्डन, क्लब, गोदाम और कुछ फैक्ट्रियां भी शामिल हैं। कार्रवाई की जद में मंत्री और वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों के बंगले भी बताए जा रहे हैं।
कई निर्माण नो-कंस्ट्रक्शन जोन में...
राजस्व, नगर निगम और जल संसाधन विभाग की संयुक्त टीम ने बड़े तालाब के किनारों पर माप-जोख कर वास्तविक सीमा रेखा तय करना शुरू किया है। प्रारंभिक जांच में पाया गया कि कई निर्माण एफटीएल और 50 मीटर के नो-कंस्ट्रक्शन जोन के भीतर हैं, जो नियमों का उल्लंघन है। प्रशासन ने ऐसे निर्माणों की सूची तैयार कर नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
अवैध निर्माण से जलधारण क्षमता हो रहा प्रभावित
विशेषज्ञों का कहना है कि तालाब के कैचमेंट एरिया और किनारों पर अवैध निर्माण से जलधारण क्षमता प्रभावित होती है। इससे न केवल जलस्तर घटता है, बल्कि प्रदूषण का खतरा भी बढ़ता है। बड़े तालाब से शहर की बड़ी आबादी को पेयजल आपूर्ति होती है, ऐसे में अतिक्रमण गंभीर चिंता का विषय है।
नियम सभी के लिए समान, किसी को बख्शा नहीं जाएगा
सूत्रों के अनुसार, जांच में कुछ प्रभावशाली लोगों के निर्माण भी प्रतिबंधित दायरे में पाए गए हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि नियम सभी के लिए समान हैं और किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि कानूनी प्रक्रिया पूरी कर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
निर्णायक मोड़ लाइफ लाइन को बचाने की मुहिम
प्रशासन जल्द ही अंतिम सूची जारी कर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू कर सकता है। साथ ही, भविष्य में अतिक्रमण रोकने के लिए स्थायी निगरानी तंत्र विकसित करने की योजना भी बनाई जा रही है। राजधानी की ‘लाइफ-लाइन’ माने जाने वाले बड़े तालाब को बचाने की यह मुहिम अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है।
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