ग्वालियर। भारतीय सेना की मारक क्षमता को और अधिक आधुनिक और घातक बनाने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर हासिल किया गया है।
ग्वालियर। भारतीय सेना की मारक क्षमता को और अधिक आधुनिक और घातक बनाने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर हासिल किया गया है। शनिवार को ग्वालियर स्थित अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस की फैसिलिटी में निर्मित 7.62 मिमी कैलिबर की 2,000 'प्रहार' लाइट मशीन गन (LMG) की पहली खेप भारतीय सेना को सौंप दी गई।
40,000 प्रहार मशीन गन का आर्डर
भारतीय सेना ने कुल 40,000 (लगभग) प्रहार मशीन गन का ऑर्डर दिया है। कंपनी ने अनुबंध (Contract) के निर्धारित समय से लगभग 11 महीने पहले ही पहली खेप तैयार कर सेना को सौंप दी है। यह हथियार 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान के तहत पूरी तरह से भारत में निर्मित है। इसमें 90% से अधिक कलपुर्जे स्वदेशी हैं। यह गन 1,000 मीटर (1 किमी) की दूरी तक सटीक निशाना लगाने में सक्षम है।
इसलिए खास है 'प्रहार' LMG
'प्रहार' मशीन गन को इजरायली तकनीक (Negev NG7) पर आधारित बताया जा रहा है, जिसे भारत की जरूरतों के हिसाब से ग्वालियर के 'स्मॉल आर्म्स कॉम्प्लेक्स' में बनाया गया है। इसका वजन लगभग 8 किलोग्राम है, जिससे सैनिकों के लिए इसे युद्ध के मैदान में ले जाना आसान होता है। इसमें सुरक्षित, सेमी-ऑटोमैटिक और ऑटोमैटिक फायरिंग मोड दिए गए हैं।
प्रतिकूल परिस्थितियों में भी है कारगर
इसमें गैस रेगुलेटर लगा है जो अत्यधिक खराब मौसम या रेतीले इलाकों में भी गन को जाम होने से रोकता है। रक्षा मंत्रालय के महानिदेशक (अधिग्रहण) ए. अनबरसु ने इस त्वरित डिलीवरी की सराहना करते हुए कहा कि यह भारतीय रक्षा उद्योग की बढ़ती ताकत का प्रमाण है।
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