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फुटबॉल ने पाटन की बेटियों को दिए सपनों के पंख

गांव के मैदान से राष्ट्रीय मंच तक, फुटबॉल ने पाटन की बेटियों को दिए सपनों के पंख

गुजरात के पाटन में फुटबॉल मैदान बेटियों के सपनों का मंच बन रहा है, जहां वे शिक्षा के साथ खेल में आगे बढ़कर पारंपरिक बाधाओं को चुनौती दे रही हैं।

गांव के मैदान से राष्ट्रीय मंच तक फुटबॉल ने पाटन की बेटियों को दिए सपनों के पंख

Football Gives Patan Daughters Wings to Dream Big |

पाटन (गुजरात) [भारत]: गुजरात के पाटन जिले का एक फुटबॉल मैदान युवा लड़कियों के लिए एक लॉन्चपैड बन रहा है, जो उन्हें शिक्षा के साथ-साथ खेल को आगे बढ़ाने में मदद कर रहा है और उन पारंपरिक बाधाओं को चुनौती दे रहा है, जिन्होंने कभी उनके अवसरों को सीमित कर दिया था।

2010 से लड़कियों को मिल रहा मुफ्त प्रशिक्षण

महादेवपुरा गांव में प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक और फुटबॉल कोच रंगतजी ठाकोर 2010 से लड़कियों को मुफ्त प्रशिक्षण दे रहे हैं। स्कूल की खेल प्रतियोगिता से शुरू हुआ यह प्रयास अब एक सतत जमीनी स्तर की फुटबॉल पहल में तब्दील हो गया है, जिसमें 100 से अधिक लड़कियां इस खेल को अपना रही हैं और 52 से अधिक राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भाग ले चुकी हैं।

स्कूल की प्रतियोगिता से शुरू हुआ सफर

ठाकोर ने बताया कि फुटबॉल में उनकी अपनी यात्रा तब शुरू हुई, जब शारीरिक शिक्षा शिक्षक राजू भाई चौधरी ने उन्हें स्कूल की खेल प्रतियोगिता के दौरान खेलने के लिए प्रोत्साहित किया। गुजरात पुलिस द्वारा स्कूलों को मुफ्त में उपलब्ध कराई गई फुटबॉल ने उन्हें एक टीम बनाने और खेल महाकुंभ में भाग लेने में मदद की।

मैदान बना बेटियों के सपनों का मंच

वर्षों से गांव का यह मैदान एक ऐसा स्थान बन गया है, जहां लड़कियां अपनी शिक्षा जारी रखते हुए खेल कौशल विकसित कर सकती हैं। किसान परिवार से आने वाली फुटबॉल खिलाड़ी कमुबेन ठाकोर ने शिक्षक प्रशिक्षण पूरा कर लिया है और राष्ट्रीय चैंपियनशिप में गुजरात का प्रतिनिधित्व करते हुए स्नातक की पढ़ाई कर रही हैं। लगभग 4,500 रुपये की मासिक छात्रवृत्ति उनकी खेल यात्रा में सहायक है, वहीं परिवार के प्रोत्साहन से वे पढ़ाई और खेल दोनों में संतुलन बनाए रखने में सक्षम हैं।

फुटबॉल से बाल विवाह के खिलाफ भी बदलाव

उन्होंने बताया कि पहले गांव में लड़कियों को शिक्षा और खेल के कम अवसर मिलते थे और अक्सर उनकी कम उम्र में ही शादी कर दी जाती थी। उन्होंने कहा कि गांव में फुटबॉल की बढ़ती लोकप्रियता लड़कियों को शिक्षा जारी रखने के लिए प्रोत्साहित कर रही है और बाल विवाह को रोकने में मदद कर रही है।

स्थानीय मैदान से राष्ट्रीय चैंपियनशिप तक

भावना ठाकुर जैसी खिलाड़ियों के लिए इस सफर ने स्थानीय प्रतियोगिताओं से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक का रास्ता खोल दिया है। उन्होंने 13 साल की उम्र में फुटबॉल खेलना शुरू किया और जिला एवं राज्य स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त करने के बाद राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भाग लिया। 2019 में अजमेर में आयोजित राष्ट्रीय चैंपियनशिप में उन्होंने दूसरा स्थान हासिल किया।

22 लड़कियां पहुंचीं राष्ट्रीय स्तर तक

ठाकोर ने बताया कि 2010 में खेल महाकुंभ की शुरुआत के बाद से उनके स्कूल की लगभग 22 लड़कियां राष्ट्रीय स्तर तक पहुंची हैं, जिनमें से लगभग 20 ने राष्ट्रीय पदक जीते हैं। स्कूल ने लगभग 60 राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में प्रथम से तृतीय स्थान प्राप्त किए हैं और कई ट्रॉफियां जीती हैं।

फुटबॉल से बढ़ रहा आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता

पदकों और चैंपियनशिप के अलावा, फुटबॉल महादेवपुरा में लड़कियों के लिए व्यापक अवसर पैदा कर रहा है। खेल उन्हें स्कूल में बने रहने, उच्च शिक्षा प्राप्त करने, आत्मविश्वास बढ़ाने और करियर तथा अधिक आत्मनिर्भरता की आकांक्षाएं विकसित करने में मदद कर रहा है।

खेल के जरिए सामाजिक बदलाव की नई तस्वीर

गांव के फुटबॉल मैदान में हो रहा यह बदलाव इस बात को उजागर करता है कि संगठित खेल तक पहुंच सामाजिक परिवर्तन का एक शक्तिशाली साधन कैसे बन सकती है, जिससे ग्रामीण लड़कियां पारंपरिक बंधनों से बाहर निकलकर बड़े मंचों पर प्रतिस्पर्धा कर सकें।

(एएनआई)

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