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बिजली के तारों से हाथियों की मौत के बाद वन विभाग..

बिजली के तारों से हाथियों की मौत के बाद वन विभाग ने की कार्रवाई की मांग

MP News : अनूपपुर/कटनी। पिछले समय में अनूपपुर में बिजली लाइन के संपर्क में आने से एक हाथी की मौत हुई थी और एक अन्य हाथी की मौत कटनी में हुई थी।

बिजली के तारों से हाथियों की मौत के बाद वन विभाग ने की कार्रवाई की मांग

(प्रतीकात्मक फोटो) |

MP News : अनूपपुर/कटनी। पिछले समय में अनूपपुर में बिजली लाइन के संपर्क में आने से एक हाथी की मौत हुई थी और एक अन्य हाथी की मौत कटनी में हुई थी। वन अधिकारी पांडे का मानना है कि स्थानीय निवासी बताते हैं कि हाथियों की आवाजाही का इतिहास लगभग 100 साल पुराना है और हाथियों की स्मृति बहुत मजबूत होती है। वे अपने पूर्वजों के रास्तों का अनुसरण करते हैं।

वन बल प्रमुख वी. एन. अम्बाडे ने शहडोल एवं रीवा वृत्त के मुख्य वन संरक्षक (क्षेत्रीय) को पत्र लिखकर निर्देश/अनुरोध किया है कि वर्तमान तथा प्रस्तावित विद्युत लाइनों की ऊँचाई निर्धारित मानकों के अनुरूप पुनः समीक्षा की जाए और यह कार्य हाथियों की आवाजाही को ध्यान में रखकर किया जाए। उन्होंने कहा कि संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान की जाए और आवश्यक सुधारात्मक उपाय (Corrective Measures) अपनाए जाएं। पत्र में अम्बाडे ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में बिजली की लाइनों के कारण किसी भी हाथी की मौत नहीं होनी चाहिए। यदि ऐसी कोई घटना होती है तो जिम्मेदारी तय की जाएगी और कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

शहडोल व रीवा वृत

एक जानकारी के अनुसार, वर्ष 2018 से पहले शहडोल और रीवा वृत्त में हाथियों की नियमित आवाजाही का कोई रिकॉर्ड नहीं था। इसी कारण विद्युत लाइनें बिछाते समय हाथियों के मूवमेंट को ध्यान में नहीं रखा गया था। हालांकि, हाल के वर्षों में शहडोल एवं रीवा वृत्त में हाथियों की नियमित आवाजाही दर्ज की गई है और ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें हाथियों की मृत्यु कथित तौर पर बिजली लाइनों के संपर्क में आने से हुई है। शहडोल वन मंडल की एक वन अधिकारी श्रद्धा पांडे ने ‘फ्री प्रेस’ को बताया कि पिछले लगभग डेढ़ वर्ष से उत्तरी शहडोल क्षेत्र में बाणसागर बांध के आसपास के जंगलों में हाथियों का एक झुंड स्थायी रूप से रहने लगा है और अब उनकी संख्या 20 से अधिक हो गई है।

उन्होंने बताया कि हाथी वहाँ बच्चे भी दे रहे हैं। ये हाथी रबी के मौसम में खेतों की ओर भी आते हैं। उनके अनुसार, ये सभी हाथी छत्तीसगढ़ से आए हैं और शहडोल क्षेत्र को अपना नया ठिकाना बना चुके हैं।

अनुपपुर व कटनी में हुई थी हाथियों की मौत

पूर्व में अनूपपुर में एक हाथी की मृत्यु बिजली लाइन के संपर्क में आने से हुई थी और कटनी में भी एक हाथी की मौत हुई थी। पांडे ने कहा कि स्थानीय लोग मानते हैं कि हाथियों की आवाजाही का इतिहास लगभग 100 वर्ष पुराना है और हाथियों की स्मृति बहुत मजबूत होती है, जिससे वे अपने पूर्वजों के मार्ग का लंबे समय बाद भी अनुसरण कर सकते हैं। समय के साथ क्षेत्र की परिस्थितियाँ/जनसंख्या संरचना बदल सकती है, पर हाथी लंबे समय बाद भी पुराने रास्तों पर चल सकते हैं।

 

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