करोड़ों रुपये की कथित हेराफेरी, बैंक धोखाधड़ी और आर्थिक अपराध से जुड़े मामले में कोलकाता की एक अदालत ने व्यवसायी महेंद्र गोयनका को 1 अगस्त, 2026 तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है।
नई दिल्ली: करोड़ों रुपये की कथित हेराफेरी, बैंक धोखाधड़ी और आर्थिक अपराध से जुड़े मामले में कोलकाता की एक अदालत ने व्यवसायी महेंद्र गोयनका को 1 अगस्त, 2026 तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है। अदालत ने कहा कि मामला अभी जांच के शुरुआती चरण में है और प्रभावी जांच के लिए आरोपी से हिरासत में पूछताछ आवश्यक है।
जमानत याचिका खारिज, पुलिस हिरासत मंजूर
कोलकाता के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने महेंद्र गोयनका की जमानत याचिका खारिज करते हुए जांच एजेंसी की पुलिस हिरासत की मांग स्वीकार कर ली। अदालत ने कहा कि अपराध की प्रकृति और गंभीरता, अब तक जुटाए गए सबूत और प्रारंभिक जांच को देखते हुए फिलहाल जमानत देना उचित नहीं है।
दिल्ली से हुई गिरफ्तारी, 1,000 करोड़ की धोखाधड़ी का आरोप
महेंद्र गोयनका को हाल ही में कोलकाता पुलिस ने दिल्ली से गिरफ्तार किया था। रायपुर निवासी गोयनका पर मध्य प्रदेश के विजयराघवगढ़ से भाजपा विधायक संजय पाठक के परिवार से जुड़ी कंपनियों को लगभग 1,000 करोड़ रुपये का चूना लगाने का आरोप है। उन पर कंपनियों पर अवैध कब्जा करने की कोशिश का भी आरोप लगाया गया है।
जाली दस्तावेजों से कंपनी पर कब्जे की कोशिश का आरोप
आरोपों के अनुसार, गोयनका पाठक परिवार की स्वामित्व वाली कोलकाता मुख्यालय स्थित कंपनी यूरो प्रतीक इस्पात इंडिया प्राइवेट लिमिटेड में वरिष्ठ प्रबंधन पद पर कार्यरत थे। आरोप है कि उन्होंने अपनी पत्नी और सहयोगियों के साथ मिलकर जाली दस्तावेजों और फर्जी हस्ताक्षरों के जरिए कंपनी के दो निदेशकों को हटाकर उनकी जगह चार अन्य लोगों की नियुक्ति कर दी। इसके अलावा उन पर कंपनी पर अवैध कब्जा करने, वित्तीय लेन-देन में हेरफेर करने और कंपनी की संपत्तियों को बेईमानी से बेचकर धन के गबन का भी आरोप है।
बचाव पक्ष ने जमानत की मांग की
सुनवाई के दौरान गोयनका के वकील ने दलील दी कि मामले से जुड़े सभी दस्तावेज पहले ही जब्त किए जा चुके हैं, इसलिए आगे पुलिस हिरासत की आवश्यकता नहीं है। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि शिकायतकर्ता शेयरों का मालिक नहीं था, राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) ने कोई प्रतिकूल आदेश पारित नहीं किया है और कंपनी रजिस्ट्रार के रिकॉर्ड भी उनके पक्ष का समर्थन करते हैं। साथ ही यह भी दावा किया गया कि गोयनका जांच में सहयोग कर रहे हैं, इसलिए उन्हें जमानत दी जानी चाहिए।
शिकायतकर्ता ने लगाए गंभीर आरोप
वास्तविक शिकायतकर्ता ने जमानत याचिका का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि एनसीएलटी द्वारा मान्यता प्राप्त मूल शेयर प्रमाणपत्र उनके स्वामित्व को साबित करते हैं। वहीं फॉर्म बीईएन-1 सहित अन्य रिकॉर्ड गोयनका को वास्तविक लाभार्थी के रूप में दर्शाते हैं। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि बड़ी रकम का गबन किया गया है, एक बैंक को धोखा दिया गया है और आरोपी पिछले दो वर्षों से कानून की प्रक्रिया से बचता रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि करोड़ों रुपये के लेन-देन की विस्तृत जांच अभी बाकी है।
सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों का पालन करने का निर्देश
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने महेंद्र गोयनका की जमानत याचिका खारिज कर दी और उन्हें 1 अगस्त, 2026 तक पुलिस हिरासत में भेजने का आदेश दिया। अदालत ने जांच अधिकारी को पुलिस हिरासत के दौरान डी.के. बसु बनाम पश्चिम बंगाल राज्य मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन करने, आरोपी की सुरक्षा सुनिश्चित करने और नियमित मेडिकल जांच कराने का भी निर्देश दिया है। गोयनका को 1 अगस्त, 2026 को दोबारा अदालत में पेश किया जाएगा।
(एएनआई)
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