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दादाजी की आखिरी इच्छा का सम्मान, ढोल-डीजे और गुब्बारों के साथ निकली अनोखी शवयात्रा

सीहोर। आमतौर पर किसी के निधन के बाद चारों तरफ मातम का माहौल होता है और लोग आंसू बहाते नजर आते हैं, लेकिन मध्य प्रदेश के...

दादाजी की आखिरी इच्छा का सम्मान ढोल-डीजे और गुब्बारों के साथ निकली अनोखी शवयात्रा

दादाजी की आखिरी इच्छा का सम्मान, ढोल-डीजे और गुब्बारों के साथ निकली अनोखी शवयात्रा |

सीहोर। आमतौर पर किसी के निधन के बाद चारों तरफ मातम का माहौल होता है और लोग आंसू बहाते नजर आते हैं, लेकिन मध्य प्रदेश के सीहोर जिले से एक ऐसा अनोखा मामला सामने आया है, जहां एक बुजुर्ग की अंतिम यात्रा में मातम की जगह ढोल-ताशों और डीजे की धुन गूंज रही थी। बेटों ने अपनी आंखों के आंसुओं को रोककर अपने पिता (दादाजी) की आखिरी इच्छा को पूरी शिद्दत के साथ निभाया।

​यह है पूरा मामला

​यह अनोखी घटना सीहोर जिले के इछावर क्षेत्र के ग्राम दीवाडिया की है। यहां के रहने वाले 100 वर्षीय बुजुर्ग गोविंद सिंह वर्मा का शुक्रवार को निधन हो गया। 100 वर्ष की लंबी और भरपूर जिंदगी जीने के बाद जब उनके निधन की खबर आई, तो परिवार और गांव में शोक तो था, लेकिन उनके जाने का तरीका बिल्कुल अलग रहा। गोविंद सिंह वर्मा ने अपने जीवनकाल में ही अपने बेटों और परिवार से कह दिया था, "जब मैं इस दुनिया से जाऊं तो कोई रोना मत। मेरी विदाई पूरी धूमधाम से, ढोल-नगाड़ों और डीजे के साथ करना।"

​बेटों ने आंसू रोककर निभाया फर्ज

​पिता की इस आखिरी इच्छा को सिर माथे रखते हुए उनके बेटों और पोतों ने रोने के बजाय उनकी अंतिम यात्रा को एक उत्सव का रूप दे दिया। शवयात्रा के आगे-आगे डीजे की गाड़ी चल रही थी और ढोल-ताशे बज रहे थे।

​गुब्बारों से सजाई गई थी अर्थी

बुजुर्ग की अर्थी को फूलों के साथ-साथ रंग-बिरंगे (मुख्य रूप से नारंगी) गुब्बारों से बेहद खूबसूरत तरीके से सजाया गया था। इस अनोखी और भावुक विदाई को देखकर पूरे गांव की आंखें नम हो गईं। लोग इस बात से बेहद प्रभावित थे कि बेटों ने अपने दुख को पीछे छोड़कर पिता के वचनों और उनकी अंतिम इच्छा का सम्मान किया।

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