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जीएसटी संग्रह में 8.1% बढ़त, 1.83 लाख करोड़

देश के जीएसटी संग्रह में 8.1% का उछाल, पहुंचा 1.83 लाख करोड़ रुपये तक

नई दिल्ली। भारत का सकल वस्तु एवं सेवा कर (GST) संग्रह फरवरी 2026 में 8.1% की बढ़ोतरी के साथ 1.83 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया। यह कर संग्रह देश की मजबूत आर्थिक गतिविधियों को दर्शाता है।

देश के जीएसटी संग्रह में 81 का उछाल पहुंचा 183 लाख करोड़ रुपये तक

Gross GST Revenue |

नई दिल्ली। भारत का सकल वस्तु एवं सेवा कर (GST) संग्रह फरवरी 2026 में  8.1% की बढ़ोतरी के साथ 1.83 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया। यह कर संग्रह देश की मजबूत आर्थिक गतिविधियों को दर्शाता है। केन्द्र सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार चालू वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक (28 फरवरी तक) कुल जीएसटी संग्रह ₹20.27 लाख करोड़ रहा है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 8.3% अधिक है। इसमें आयात से प्राप्‍त रेवेन्‍यू में हुई उल्लेखनीय बढ़ोतरी का मुख्य योगदान रहा। इस दौरान कुल घरेलू जीएसटी रेवेन्‍यू 5.3 फीसदी बढ़ा है। यह बढ़कर लगभग 1.36 लाख करोड़ रुपये रहा। वहीं, आयात से सकल राजस्व 17.2 फीसदी बढ़कर 47,837 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। कुल रिफंड 10.2 फीसदी बढ़कर 22,595 करोड़ रुपये रहा।

GST संग्रह में बढ़त, महाराष्ट्र अव्वल

कुल जीएसटी कलेक्‍शन 1.61 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा। यह पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 7.9 फीसदी अधिक है। शुद्ध सेस रेवेन्‍यू 5,063 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल फरवरी में 13,481 करोड़ रुपये था। शुद्ध सेस राजस्व की बात करें तो पिछले साल फरवरी के 13,481 करोड़ रुपये के मुकाबले तेजी से घटकर 5,063 करोड़ रुपये रह गया। राज्य-वार पोस्ट-सेटलमेंट जीएसटी राजस्व वसूली में मिली जुली तस्वीर देखने को मिली। उद्योग प्रधान राज्यों ने अच्छा राजस्व संग्रह दर्ज किया जबकि छोटे इलाकों में इसमें कमी आई। महाराष्ट्र राज्य ने प्री-सेटलमेंट 10,286 करोड़ रुपये के साथ टैक्स में सबसे बड़ा योगदान दिया। उसके बाद कर्नाटक और गुजरात का नंबर आता है। केन्द्र सरकार के सूत्रों ने बताया कि महाराष्ट्र ने जीएसटी में सबसे ज्यादा योगदान दिया जबकि कर्नाटक और गुजरात अगले बड़े योगदान देने वालों के तौर पर दूसरे नंबर पर रहे। हिमाचल प्रदेश, चंडीगढ़, उत्तराखंड, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश के संग्रह में सकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई। बंगाल, झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, त्रिपुरा और जम्मू-कश्मीर जैसे राज्यों में राजस्व वृद्धि में कमी देखी गई।

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