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ग्वालियर में ओलावृष्टि से गेहूं संकट

ग्वालियर में एक लाख हेक्टेयर गेहूं की फसल पर संकट, ओलावृष्टि से किसानों की बढ़ी मुश्किलें

ग्वालियर। ग्वालियर-चंबल अंचल में किसनों के माथे पर चिंता की लकीरें गहरी हो गई हैं।

ग्वालियर में एक लाख हेक्टेयर गेहूं की फसल पर संकट ओलावृष्टि से किसानों की बढ़ी मुश्किलें

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ग्वालियर। ​ग्वालियर-चंबल अंचल में किसनों के माथे पर चिंता की लकीरें गहरी हो गई हैं। शनिवार और रविवार को ग्वालियर शहर सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में हुई भारी ओलावृष्टि और बेमौसम बारिश ने पककर तैयार खड़ी गेहूं की फसल को बुरी तरह तहस-नहस कर दिया है।

​गेहूं की फसल पर सीधा असर

​करीब एक लाख हेक्टेयर क्षेत्र में लगी गेहूं की फसल पर इस आपदा का सीधा असर पड़ा है। खेतों में खड़ी फसल ओलों की मार और तेज हवाओं के कारण जमीन पर बिछ गई है। किसानों का कहना है कि यह समय कटाई का था, लेकिन इस प्राकृतिक मार ने उनके साल भर के पसीने और मेहनत को मिट्टी में मिला दिया है।

​मौसम विभाग ने जारी किया ऑरेंज औऱ येलो अलर्ट

​भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने ग्वालियर सहित प्रदेश के कई जिलों के लिए ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया है। 8 मार्च (संभावित रूप से अगले कुछ दिनों तक) तक आंधी-तूफान और बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। इसके साथ 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने और बिजली गिरने की आशंका जताई गई है।

​तापमान में करीब 5 डिग्री की गिरावट

बेमौसम बारिश की वजह से अधिकतम तापमान में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की गई है।

सदमें में ​किसान, सफेद ओलों से ढके खेत

​कटाई के ठीक पहले आई इस आपदा ने किसानों को गहरे सदमे में डाल दिया है। ओलावृष्टि से न केवल गेहूं, बल्कि सरसों और चने की बची हुई फसलों को भी नुकसान पहुँचा है। ग्वालियर के सिटी सेंटर और ग्रामीण इलाकों की सड़कें और खेत ओलों की सफेद चादर से ढक गए, जो देखने में भले ही सुंदर हों, लेकिन किसानों के लिए यह किसी त्रासदी से कम नहीं है। एक किसान ने कहा कि सरकार को तुरंत सर्वे कराकर उचित मुआवजे की घोषणा करनी चाहिए, वरना हम पूरी तरह बर्बाद हो जाएंगे।

​नुकसान का आकलन करने के निर्देश

राज्य सरकार ने संबंधित जिला अधिकारियों को फसल नुकसान का प्रारंभिक आकलन (Survey) करने के निर्देश दिए हैं ताकि प्रभावित किसानों को राहत राशि प्रदान की जा सके। फिलहाल, मौसम की अनिश्चितता को देखते हुए किसानों को सुरक्षित स्थानों पर अनाज रखने की सलाह दी गई है।

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