करनैलगंज की रामलीला में दशहरे से एक दिन पहले 'फांसी के नाटक' का अनोखा मंचन होता है। इसमें हत्या की घटना से लेकर पुलिस जांच, अदालत की सुनवाई और सजा तक की पूरी प्रक्रिया दिखाई जाती है।
गोंडा: बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक दशहरा देशभर में धूमधाम से मनाया जाता है, लेकिन गोंडा के करनैलगंज में दशहरे से एक दिन पहले निभाई जाने वाली एक अनोखी परंपरा लोगों के आकर्षण का केंद्र रहती है। यहां की ऐतिहासिक रामलीला में 'फांसी के नाटक' का मंचन किया जाता है, जिसे देखने के लिए हर साल हजारों की संख्या में लोग जुटते हैं। इस नाटक में दिखाया जाता है कि एक सौदागर दशहरे के मेले में कारोबार करने आता है, लेकिन इसी दौरान एक आपराधिक प्रवृत्ति का व्यक्ति उसकी हत्या कर देता है। इसके बाद पुलिस की जांच से लेकर अदालत में सुनवाई और सजा सुनाए जाने तक की पूरी प्रक्रिया का मंचन किया जाता है।
करनैलगंज की रामलीला में 'फांसी का नाटक' बना आकर्षण
रामलीला कमेटी के स्थानीय कलाकार पुलिसकर्मी, डॉक्टर, वकील, जज और जल्लाद की भूमिका निभाते हैं। नाटक का सबसे रोमांचक दृश्य अंत में सामने आता है, जब रामलीला मैदान में करीब 30 फीट ऊंचे तख्ते पर प्रतीकात्मक रूप से दोषी युवक को फांसी के फंदे पर लटकाते हुए दिखाया जाता है। इस दृश्य को देखने के लिए दर्शकों की भारी भीड़ उमड़ती है। करनैलगंज की रामलीला में होने वाले इस अनूठे आयोजन का उद्देश्य केवल मनोरंजन करना नहीं, बल्कि लोगों को अपराध के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करना भी है। यह मंचन समाज को संदेश देता है कि अपराध के गंभीर परिणाम हो सकते हैं और कानून एवं न्याय का महत्वपूर्ण स्थान है। धार्मिक परंपरा के साथ सामाजिक चेतना का संदेश देने वाला करनैलगंज का यह 'फांसी का नाटक' दशहरे से पहले रामलीला का प्रमुख आकर्षण बना रहता है।
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