हनुमानगढ़ी महंत धर्मदास ने कहा कि राम मंदिर का प्रबंधन ट्रस्ट की बजाय साधु-संतों को सौंपा जाए, ट्रस्ट सिर्फ लेखा-जोखा रखे।
अयोध्या (उत्तर प्रदेश)। हनुमानगढ़ी मंदिर के महंत धर्मदास ने मंगलवार को कहा कि अयोध्या स्थित राम मंदिर का प्रबंधन मौजूदा ट्रस्ट के बजाय साधु-संतों को सौंपा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट केवल लेखा-जोखा रख सकता है, लेकिन मंदिर के धार्मिक और प्रशासनिक मामलों की जिम्मेदारी साधु-संतों के हाथों में होनी चाहिए।
'प्राचीन व्यवस्था फिर से लागू की जाए'
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट वर्तमान में राम मंदिर का प्रबंधन कर रहा है। महंत धर्मदास ने राम मंदिर चंदे में कथित हेराफेरी के मामले में कथित रूप से गबन की गई पूरी धनराशि की वसूली की भी मांग की। बातचीत में उन्होंने कहा, "हमें ट्रस्ट नहीं चाहिए। साधु-संत व्यवस्था संभालें। ट्रस्ट लेखा-जोखा रख सकता है, लेकिन मंदिर के अंदर और बाहर की व्यवस्था साधुओं द्वारा ही संचालित होनी चाहिए।" उन्होंने कहा, "हम चाहते हैं कि प्राचीन व्यवस्था फिर से लागू की जाए और मंदिर का प्रबंधन साधु-संतों को सौंप दिया जाए। पहले साधु-संत वहां पूजा करते थे, लेकिन अब मंदिर में जाने के लिए पास लेना पड़ता है।"
प्रधानमंत्री को पत्र लिखने की तैयारी
महंत धर्मदास ने बताया कि वे और अन्य संत इस मुद्दे को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखना चाहते थे, लेकिन जिला मजिस्ट्रेट से मिलने का समय नहीं मिलने के कारण उनकी प्रस्तावित प्रेस कॉन्फ्रेंस स्थगित करनी पड़ी। उन्होंने कहा, "हम प्रधानमंत्री को पत्र लिखने के लिए जिला मजिस्ट्रेट से मिलना चाहते थे। समय नहीं मिला, इसलिए प्रेस कॉन्फ्रेंस रद्द करनी पड़ी। इसे बाद में करेंगे।"
चंदे की पूरी रकम बरामद करने की मांग
महंत धर्मदास ने महंत नृत्य गोपाल दास का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी स्वास्थ्य स्थिति ठीक नहीं थी, जिसके कारण अन्य लोग काम संभालते रहे। उन्होंने कहा कि आज जो स्थिति सामने आई है, वह सभी के सामने है। चंदे में कथित हेराफेरी के मामले पर उन्होंने कहा, "आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया है, लेकिन पूरी धनराशि बरामद होनी चाहिए। ईश्वर उन्हें सद्बुद्धि दें।"
14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे गए आरोपी
सोमवार को अयोध्या की एक स्थानीय अदालत ने चंदा हेराफेरी मामले के सभी आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। यह कार्रवाई श्री राम जन्मभूमि मंदिर में वित्तीय अनियमितताओं और चढ़ावे के कथित दुरुपयोग की जांच के बाद की गई। फिलहाल इस मामले की जांच विशेष जांच दल (एसआईटी) कर रही है। इस प्रकरण को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति भी गरमा गई है और मंदिर के वित्तीय प्रबंधन को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।
ANI
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