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मंत्री बागरी जाति मामले में HC का आदेश

मंत्री प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण पत्र मामले में हाईकोर्ट का बड़ा निर्देश

मध्य प्रदेश की नगरीय प्रशासन राज्यमंत्री और सतना जिले की रैगांव (SC) विधानसभा सीट से विधायक प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण पत्र को लेकर चल रहा विवाद अब कानूनी प्रक्रिया के अगले चरण में पहुँच गया है।

 मंत्री प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण पत्र मामले में हाईकोर्ट का बड़ा निर्देश

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जबलपुर। ​मध्य प्रदेश की नगरीय प्रशासन राज्यमंत्री और सतना जिले की रैगांव (SC) विधानसभा सीट से विधायक प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण पत्र को लेकर चल रहा विवाद अब कानूनी प्रक्रिया के अगले चरण में पहुँच गया है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने इस मामले में एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है।

​हाईकोर्ट की युगलपीठ ने की सुनवाई 

जबलपुर हाईकोर्ट की युगलपीठ (जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस ए.के. सिंह) ने इस मामले की सुनवाई की। कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार की 'राज्य स्तरीय उच्च स्तरीय जाति छानबीन समिति' (High-Level Caste Scrutiny Committee) को निर्देश दिए हैं कि वे इस मामले की निष्पक्ष जांच करें।

60 दिन में लें निर्णय

अदालत ने स्पष्ट किया है कि समिति को 60 दिनों के भीतर, यानी 30 जून 2026 तक इस मामले में अपना अंतिम निर्णय लेना होगा। कोर्ट ने यह भी कहा है कि यदि निर्धारित समय-सीमा के भीतर समिति कोई निर्णय नहीं लेती है, तो याचिकाकर्ता को अपनी याचिका फिर से दायर (revive) करने की स्वतंत्रता होगी।

​विवाद कांग्रेस बनाम मंत्री से जुड़ा

​यह मामला कांग्रेस नेता और अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार द्वारा दायर एक याचिका से जुड़ा है। कांग्रेस नेता का दावा है कि प्रतिमा बागरी अनुसूचित जाति (SC) वर्ग से नहीं आती हैं, बल्कि उन्होंने गलत तरीके से प्रमाण पत्र बनवाकर आरक्षण का लाभ लिया है और चुनाव लड़ा है।

​मंत्री प्रतिमा बागरी ने आरोप को खारिज किया

मंत्री ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि कांग्रेस नेता केवल 'लाइमलाइट' (प्रचार) पाने के लिए उनके जाति प्रमाण पत्र पर सवाल उठा रहे हैं। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि अतीत में कांग्रेस के भी बागरी विधायक रहे हैं।

दोनों पक्षों में तीखी बयानबाजी

​इस विवाद के दौरान दोनों पक्षों के बीच तीखी बयानबाजी भी देखी गई है। जहाँ मंत्री बागरी ने इसे राजनीति से प्रेरित बताया है, वहीं कांग्रेस नेता प्रदीप अहिरवार ने पलटवार करते हुए तंज कसा कि "उनकी (मंत्री की) राजनीतिक चमक अब बुझने वाली है।" ​यह मामला अब पूरी तरह से प्रशासनिक जांच समिति के पाले में है, और आने वाले 60 दिनों में इस पर आने वाला निर्णय राज्य की राजनीति में काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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