उमरिया। प्रागैतिहासिक धरोहरों की खोज में जुटी दिल्ली के इतिहासकारों की एक टीम ने जरहा गांव में पांच हजार साल पुराने लघु पाषाण (माइक्रोलिथ) उपकरण मिलने का दावा किया है।
उमरिया। प्रागैतिहासिक धरोहरों की खोज में जुटी दिल्ली के इतिहासकारों की एक टीम ने जरहा गांव में पांच हजार साल पुराने लघु पाषाण (माइक्रोलिथ) उपकरण मिलने का दावा किया है। टीम के अनुसार ये अवशेष मानव सभ्यता के प्रारंभिक दौर के महत्वपूर्ण प्रमाण हो सकते हैं।
खुदाई में मिले चीजों का दस्तावेजीकरण भी किया
तीन वर्षों से 2021 के बाद से लगातार क्षेत्र में सर्वे कर रही पांच सदस्यीय टीम ने हाल ही में गांव के पास स्थित एक स्थान पर खुदाई और सतही अध्ययन के दौरान पत्थर के छोटे-छोटे औजार खोजे। इनका दस्तावेजीकरण भी किया गया है।
माइक्रोलिथ उपकरण शिकार और दैनिक उपयोग के
टीम का कहना है कि ये लघु पाषाण उपकरण (माइक्रोलिथ) संभवतः शिकार और दैनिक उपयोग में लाए जाते थे। ऐसे उपकरण आमतौर पर प्रागैतिहासिक काल में मानव द्वारा उपयोग किए जाते थे और इनकी उपस्थिति किसी प्राचीन बस्ती या गतिविधि क्षेत्र की ओर संकेत करती है।
पहाड़ी इलाकों में भी मिले प्रमाण
इतिहासकारों के मुताबिक, क्षेत्र के एक हाई स्कूल के पीछे और आसपास की पहाड़ियों की ढलानों पर भी ऐसे पाषाण अवशेष देखे गए हैं। प्रारंभिक आकलन के अनुसार ये उपकरण लगभग 5000 वर्ष पुराने हो सकते हैं।
वैज्ञानिक परीक्षण की मांगी अनुमति
टीम ने संबंधित विभाग को इसकी सूचना देते हुए विस्तृत वैज्ञानिक परीक्षण और पुरातात्विक सर्वेक्षण की मांग की है, ताकि इन अवशेषों की सटीक आयु और ऐतिहासिक महत्व का निर्धारण किया जा सके।
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