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हुमायूं कबीर ने छोड़ी रेजीनगर, नवोदा चुनी

दो सीटों से जीतकर हुमायूं कबीर ने छोड़ी रेजीनगर, नवोदा सीट चुनी

आम जनता उन्नयन पार्टी (एजेयूपी) के सुप्रीमो हुमायूं कबीर विधानसभा में मुर्शिदाबाद जिले की विधानसभा सीट नवोदा के ही विधायक रहेंगे और इसी जिले की विधानसभा सीट रेजीनगर को छोड़ देंगे।

दो सीटों से जीतकर हुमायूं कबीर ने छोड़ी रेजीनगर नवोदा सीट चुनी

Humayun Kabir Swearing-in |

कोलकाता। आम जनता उन्नयन पार्टी (एजेयूपी) के सुप्रीमो हुमायूं कबीर विधानसभा में मुर्शिदाबाद जिले की विधानसभा सीट नवोदा के ही विधायक रहेंगे और इसी जिले की विधानसभा सीट रेजीनगर को छोड़ देंगे। वे इस विधानसभा चुनाव में दोनों से सीट से जीते हैं। उन्होंने बतौर नवोदा के विधायक विधानसभा में शपथ ली। पिछले विधानसभा चुनाव में वे मुर्शिदाबाद जिले के भरतपुर सीट के तृणमूल कांग्रेस विधायक थे।

दो सीटों पर जीत का रिकॉर्ड

इस बार विधानसभा में ऐसे दो नेता हैं जिन्होंने दो-दो सीटों से जीत हासिल की। एक हैं खुद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और दूसरे हैं एजेयूपी के सुप्रीमो हुमायूं कबीर। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पूर्व मेदिनीपुर जिले के नंदीग्राम और कोलकाता की भवानीपुर सीट से जीते तो हुमायूं कबीर मुर्शिदाबाद जिले के नवोदा और रेजीनगर से जीते।

नवोदा सीट से ली शपथ

एजेयूपी सुप्रीमो हुमायूं कबीर ने विधानसभा में नवोदा सीट के विधायक के रूप में शपथ ली। उन्होंने इस सीट से भाजपा को पराजित किया। उन्होंने रेजीनगर सीट से भी भाजपा को पराजित किया। हुमायूं कबीर को तृणमूल कांग्रेस से विवाद के चलते अलग होना पड़ा। उन्होंने मुर्शिदाबाद जिले में रेजीनगर और बेलडांगा के बीच बाबरी नाम से मस्जिद बनाना शुरू किया। इसी पर तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो व तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से विवाद हुआ। ममता बनर्जी ने उन्हें पार्टी से बाहर कर दिया। तृणमूल कांग्रेस से बाहर होने के बाद भी वे भरतपुर सीट से इस्तीफा नहीं दिया और अपनी नई पार्टी एजेयूपी गठित की।

विधानसभा में मुलाकात और संदेश

विधानसभा पहुंच कर उन्होंने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात की और उनसे गले मिले, मिठाई खिलाई। विधानसभा में वे अकेले विधायक हैं जिन्होंने भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के विधायकों को मिठाई खिलाई। उनका कहना है कि राजनीति में बहुत कड़वाहट आ गई है, उसे कम करना चाहिए। लेकिन वे अपने को भाजपा और तृणमूल कांग्रेस, दोनों के ही विरोधी बताते हैं।

चुनावी आरोप-प्रत्यारोप

चुनाव प्रचार में तृणमूल कांग्रेस ने उन्हें भाजपा का मददगार बताया और भाजपा ने उन्हें तृणमूल कांग्रेस का आदमी बता कर उन पर निशाना साधा था। लेकिन उन्होंने दोनों पार्टियों को पराजित किया।

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