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डिजिटल अरेस्ट में ATS अफसर बनकर डराया, सूझबूझ से किया साजिश को नाकाम

भोपाल। मध्य प्रदेश में साइबर अपराधियों द्वारा 'डिजिटल अरेस्ट' (Digital Arrest) के नाम पर ठगी करने का एक और...

डिजिटल अरेस्ट में ats अफसर बनकर डराया सूझबूझ से किया साजिश को नाकाम

डिजिटल अरेस्ट में ATS अफसर बनकर डराया, सूझबूझ से किया साजिश को नाकाम |

भोपाल। मध्य प्रदेश में साइबर अपराधियों द्वारा 'डिजिटल अरेस्ट' (Digital Arrest) के नाम पर ठगी करने का एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। इस बार ठगों ने एक बुजुर्ग को अपना निशाना बनाने की कोशिश की, लेकिन उनकी सतर्कता ने लाखों रुपये लुटने से बचा गया। 

आतंकी कनेक्शन का दिखाया डर

ठगों ने बुजुर्ग को आतंकवादी गतिविधियों में लिप्त होने की फर्जी धमकी दी। जालसाजों ने खुद को एंटी-टेररिज्म स्क्वाड (ATS) का अधिकारी बताकर डराया। पीड़ित को डराने के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट का फर्जी गिरफ्तारी वारंट भी दिखाया गया। पुलिस की वर्दी पहनकर जालसाजों ने व्हाट्सएप (WhatsApp) वीडियो कॉल के जरिए करीब 13 मिनट तक बुजुर्ग को मानसिक दबाव में रखा।

​ऐसे बुना साजिश का जाल

​यह घटना मध्य प्रदेश की है, जहां साइबर अपराधियों ने एक बुजुर्ग को फोन किया। ठगों ने खुद को ATS (Anti-Terrorism Squad) का बड़ा अधिकारी बताया और दावा किया कि बुजुर्ग का नाम और बैंक खाता किसी आतंकवादी संगठन के साथ संदिग्ध लेनदेन में पाया गया है। ​अपनी बात को सच साबित करने के लिए अपराधियों ने बॉम्बे हाईकोर्ट के नाम से एक फर्जी वारंट भी भेजा। इसके बाद उन्होंने व्हाट्सएप पर वीडियो कॉल की, जिसमें वे पुलिस की वर्दी पहने हुए थे ताकि पीड़ित को उन पर पूरा भरोसा हो जाए।

​बुजुर्ग ने ऐसे बचाए पैसे

वीडियो कॉल के दौरान जब अपराधी बुजुर्ग पर दबाव बना रहे थे और पैसे ट्रांसफर करने की बात कहने वाले थे, तभी पीड़ित को उनकी बातों और लहजे पर संदेह हो गया। उन्होंने बिना घबराए तुरंत कॉल काट दिया और किसी भी तरह के झांसे में आने से बच गए। उनकी इस त्वरित प्रतिक्रिया और सूझबूझ के कारण अपराधियों की 'डिजिटल अरेस्ट' की यह कोशिश नाकाम हो गई।

​सरकारी एजेंसी नहीं करती डिजिटल अरेस्ट

​पुलिस और प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कोई भी सरकारी एजेंसी या अदालत वीडियो कॉल के माध्यम से 'डिजिटल अरेस्ट' नहीं करती है। यदि कोई आपसे इस तरह की बात करे या डराए तो तुरंत फोन काट दें और स्थानीय पुलिस या साइबर क्राइम पोर्टल (1930) पर इसकी सूचना दें।

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