उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने श्रमिकों को न्यूनतम मजदूरी के साथ ही पीएफ और ग्रेच्युटी का लाभ देने पर गंभीरता से विचार कर रही है।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने श्रमिकों को न्यूनतम मजदूरी के साथ ही पीएफ और ग्रेच्युटी का लाभ देने पर गंभीरता से विचार कर रही है। इसके लिए प्रदेश सरकार ने चार नई श्रम संहिताओं के क्रियान्वयन की प्रक्रिया तेज कर दी है।
नई श्रम संहिताओं को लागू करने की प्रक्रिया तेज
यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार ने राज्य में चार नई श्रम संहिताओं के क्रियान्वयन की प्रक्रिया तेज कर दी है। इसके तहत श्रम कानूनों को सरल बनाकर श्रमिकों के काम के घंटे, वेतन, पीएफ और ग्रेच्युटी में बदलाव होगा।
नियमों का मसौदा सार्वजनिक, सुझाव आमंत्रित
श्रमिकों को न्यूनतम सुरक्षा भी मिलेगी। इसके लिए राज्य स्तर पर नियमों का मसौदा अधिसूचित कर संबंधित पक्षकारों से सुझाव और आपत्तियां लेने के लिए इसे सार्वजनिक डोमेन में डाला गया है।
मई में अंतिम नियमों की अधिसूचना संभव
मिले सुझावों के आधार पर अंतिम नियमों को मई में अधिसूचित किया जाएगा। नई श्रम व्यवस्था के तहत 29 पुराने और जटिल श्रम कानूनों को समाप्त कर चार संहिताओं- वेतन संहिता 2019, औद्योगिक संबंध संहिता 2020, व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य दशाएं संहिता 2020 और सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 में समाहित किया गया है।
वेतन की परिभाषा में बड़ा बदलाव
इसके तहत सबसे बड़ा बदलाव वेतन की परिभाषा में किया गया है। कर्मचारी के कुल वेतन (सीटीसी) का कम से कम 50 फीसदी हिस्सा मूल वेतन माना जाएगा।
पीएफ, ग्रेच्युटी और बोनस में बढ़ोतरी तय
इससे पीएफ, ग्रेच्युटी और बोनस जैसी देनदारियों में बढ़ोतरी होगी। इसके अलावा अब प्रबंधकीय और सुपरवाइजरी कर्मचारी भी कानूनी सुरक्षा के दायरे में आएंगे।
ठेका श्रमिकों की जिम्मेदारी तय
जबकि ठेका श्रमिकों की जिम्मेदारी भी प्रमुख नियोक्ता पर तय की गई है।
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