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संवर रहा चकवाली गांव का इको-टूरिज्म मॉडल

सहारनपुर में बन रहा देश का पहला भारत मानचित्र आकार का ‘सुभाष चंद्र बोस भारत सरोवर’, पर्यटन को मिलेगी नई पहचान

सहारनपुर जिले के चकवाली गांव में नेताजी सुभाष चंद्र बोस को समर्पित देश का पहला भारत मानचित्र आकार का ‘सुभाष चंद्र बोस भारत सरोवर’ विकसित किया जा रहा है।

सहारनपुर में बन रहा देश का पहला भारत मानचित्र आकार का ‘सुभाष चंद्र बोस भारत सरोवर’ पर्यटन को मिलेगी नई पहचान

India Map-Shaped Subhas Chandra Bose Sarovar Nears Completion in Saharanpur |

सहारनपुर (उत्तर प्रदेश)। सहारनपुर जिले के चकवाली गांव में देशभक्ति और पर्यटन का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। यहां नेताजी सुभाष चंद्र बोस को समर्पित देश का पहला भारत मानचित्र आकार का ‘सुभाष चंद्र बोस भारत सरोवर’ विकसित किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग इस परियोजना को इको-टूरिज्म मॉडल के रूप में करीब 2.43 करोड़ रुपये की लागत से विकसित कर रहा है, जिसका 80 प्रतिशत से अधिक कार्य पूरा हो चुका है।

वॉच टावर, फूड स्टॉल और नेताजी की भव्य प्रतिमा से सजेगा परिसर

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि यह परियोजना सहारनपुर की पर्यटन क्षमता को नई पहचान देगी। सरोवर परिसर में पर्यटकों की सुविधा के लिए आकर्षक पाथवे, पत्थर की बेंच, आधुनिक साइनेज सिस्टम, गज़ेबो, वॉच टावर, टॉयलेट ब्लॉक और फूड स्टॉल विकसित किए जा रहे हैं। इसके साथ ही व्यापक स्तर पर लैंडस्केपिंग और हरित बागवानी का कार्य भी कराया जा रहा है। परिसर में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की भव्य प्रतिमा स्थापित करने के लिए विशेष फाउंडेशन बेस का निर्माण भी प्रस्तावित है।

उपेक्षित तालाब से पर्यटन केंद्र बनने तक का सफर

मंत्री ने बताया कि वर्ष 2025 में सहारनपुर में लगभग 4.60 लाख पर्यटकों का आगमन दर्ज किया गया था। ऐसे में ‘भारत सरोवर’ जैसी अनूठी परियोजनाएं जिले को राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। चकवाली गांव के निवासी नकूल चौधरी ने बताया कि यह तालाब कभी उपेक्षा के कारण डंपिंग ग्राउंड बन गया था, लेकिन ग्रामीणों के सामूहिक प्रयासों से इसे नया स्वरूप मिला है। भारत के नक्शे के आकार में बने इस सरोवर की लंबाई करीब 32 मीटर और चौड़ाई 29 मीटर है।

ग्रामीणों को रोजगार और विकास की नई उम्मीद

ग्रामीणों को उम्मीद है कि परियोजना पूरी होने के बाद यह स्थान प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित होगा, जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार के अवसर मिलेंगे तथा गांव की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

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