नई दिल्ली। खाने-पीने की वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी से खुदरा महंगाई नए वित्त वर्ष 2026-27 में 1.8% बढ़कर 4.3% तक पहुँच सकती है: क्रिसिल।
नई दिल्ली।
मंहगाई के मोर्चे पर आम आदमी को लग सकता है झटका। खाने-पीने की वस्तुओं की कीमतों में तेजी के चलते खुदरा महंगाई एक अप्रैल से शुरू होने वाले नए वित्त वर्ष 2026-27 में 1.8 फीसदी बढ़कर 4.3 फीसदी के स्तर पर पहुंच सकती है। "क्रिसिल" ने अपनी रिपोर्ट में यह अनुमान लगाया है। "क्रिसिल" ने बृहस्पतिवार को जारी रिपोर्ट में कहा, खाद्य वस्तुओं की महंगाई के मौजूदा निचले स्तर से सामान्य होने की वजह से खुदरा महंगाई बढ़ेगी। यह बढ़ोतरी आम जनता के लिए महंगाई का नया झटका साबित हो सकती है। जनवरी 2026 में थोक महंगाई (WPI) में भी वृद्धि देखी गई थी।
क्रिसिल का महंगाई अनुमान 2026
क्रिसिल ने चालू वित्त वर्ष 2025-26 में इसके 2.5 फीसदी रहने का अनुमान लगाया गया है। हालांकि, खाद्य वस्तुओं की कीमतें मौटे तौर पर नरम रहने की उम्मीद है, जिसे 2026 में मानसून के सामान्य रहने से समर्थन मिलेगा। केन्द्र द्वारा किये गये महंगाई के संशोधित ढांचे के तहत खाद्य महंगाई में उतार-चढ़ाव कम हो सकता है। मुख्य महंगाई में ज्यादा उतार-चढ़ाव वाले खाद्य और बिजली की मुद्रास्फीति दर को शामिल नहीं किया जाता है। इससे आरबीआई को रेपो दर पर यथास्थिति बनाए रखने में मदद मिलेगी।
क्रिसिल: मुद्रास्फीति में बदलाव
क्रेडिट रेटिंग इंफॉर्मेशन सर्विसेज ऑफ इंडिया लिमिटेड (क्रिसिल) एक रेटिंग कंपनी है जो बाजार अनुसंधान के साथ - साथ जोखिम और नीति सलाहकार सेवाएं प्रदान करती है। क्रिसिल की रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि मुद्रास्फीति की नई श्रृंखला में खाद्य वस्तुओं का कम भारांश खुदरा महंगाई में इस बढ़ोतरी को सीमित कर देगा। नई श्रृंखला में खाद्य वस्तुओं का भारांश पुरानी सीरीज के 45.86 फीसदी से कम होकर 36.75 फीसदी रह गया है। यानी आधार प्रभाव से महंगाई में होने वाली बढ़ोतरी पुरानी श्रृंखला के मुकाबले कम होगी। गैर-खाद्य महंगाई से भी मुद्रास्फीति में होने वाली वृद्धि को सीमित रखने में मदद मिलेगी। सोने-चांदी में उछाल से आरबीआई ने 2026-27 की पहली और दूसरी तिमाही के लिए महंगाई अनुमान को बढ़ाकर क्रमशः 4 फीसदी एवं 4.2 फीसदी कर दिया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्य महंगाई इंडेक्स का भारांश 47.3 फीसदी से बढ़कर 57.89 फीसदी हो गया है। इससे हेडलाइन महंगाई पर इसका असर और मजबूत हुआ है और खुदरा मुद्रास्फीति में बढ़ोतरी को सीमित रखने में मदद मिलेगी। वित्त वर्ष 2025-26 के पहले नौ महीनों में हेडलाइन मुद्रास्फीति की तुलना में मुख्य महंगाई दर ज्यादा तेजी से बढ़ी है, जिसकी वजह सोने और चांदी की कीमतों में भारी उछाल रही है।
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