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जियो-एयरटेल को बढ़ी कड़ी प्रतिस्पर्धा

जियो - एयरटेल को मिलेगी वोडाफोन -आइडिया , बीएसएनल से चुनौती

नई दिल्ली। जियो और एयरटेल से मिल रही चुनौतियों का सामना करने के लिए सरकारी कंपनी बीएसएनएल और प्राइवेट टेलीकॉम कंपनी वोडा-आइडिया एक साथ आ सकते हैं।

जियो - एयरटेल को मिलेगी वोडाफोन -आइडिया  बीएसएनल से चुनौती

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नई दिल्ली। जियो और एयरटेल से मिल रही चुनौतियों का सामना करने के लिए सरकारी कंपनी बीएसएनएल और प्राइवेट टेलीकॉम कंपनी वोडा-आइडिया एक साथ आ सकते हैं। दोनों कंपनियां टावर से लेकर फाइबर और स्पेक्ट्रम शेयरिंग को लेकर रणनीतिक साझेदारी पर बातचीत का दौर जारी है। अगर ये साझेदारी अंजाम तक पहुंचती है तो मोबाइल की दुनिया में आने वाले दिनों बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

रणनीतिक साझेदारी पर बातचीत

सरकारी कंपनी बीएसएनएल और प्राइवेट टेलीकॉम कंपनी वोडा-आइडिया ने जियो और एयरटेल से मुकाबला और अपनी खोई जमीन वापस हासिल करने को रणनीतिक साझेदारी को लेकर बातचीत शुरू की है। यह बातचीत लागत को कम करने, नेटवर्क को बेहतर बनाने और 5G रोलआउट को तेज करने की योजना को मूर्त रूप देने का हिस्सा मानी जा रही है। दोनों कंपनियां टावर से लेकर फाइबर और स्पेक्ट्रम शेयर करने पर बात कर रही हैं। समझा जाता है कि दोनों कंपनियां एक-दूसरे के साथ अपने टावरों व अन्य चीजों को बांटना चाहती हैं।

ग्राहकों को हो सकता है फायदा

अगर वह हाथ मिलाती हैं तो इससे आम लोगों को भी फायदा हो सकता है। खासतौर पर बीएसएनएल और वोडा-आइडिया के ग्राहकों को जो अपने क्षेत्र में 5G सेवाओं के रोलआउट का इंतजार कर रहे हैं। इससे दूर दराज के गांवों के साथ-साथ शहरी क्षेत्र में भी दोनों कंपनियों का नेटवर्क कवरेज बेहतर होगा।

संसदीय समिति को दी गई जानकारी

"मिंट" की एक रिपोर्ट के अनुसार, बीएसएनएल और वोडा-आइडिया के बीच चल रही बातचीत को दूरसंचार विभाग ने एक संसदीय समिति को कन्फर्म किया है। याद रहे कि वोडा-आइडिया और बीएसएनएल दोनों ही घटते ग्राहकों की संख्या, नेटवर्क कवरेज जैसे मुद्दों से जूझ रही हैं। BSNL ने पिछले साल देश में अपनी 4G सेवाओं का रोलआउट किया है, लेकिन उसे ग्राहकों का वह फायदा नहीं मिला, जिसकी उम्मीद लगाई जा रही थी। विशेषज्ञों को उम्मीद है कि दोनों कंपनियां मिलकर जियो और एयरटेल की तरह बेहतर कवरेज और सर्विसेज देंगी और अनलिमिटिड इंटरनेट जैसे रीचार्ज बेनिफिट भी देना शुरू कर सकती हैं।

सरकार ने क्या कहा

रिपोर्ट के अनुसार, लोकसभा की वेबसाइट पर 16 मार्च की एक रिपोर्ट के अनुसार, दूरसंचार सचिव अमित अग्रवाल ने संसदीय समिति को बताया है कि दोनों के बीच बातचीत शुरू हो गई है। यह बातचीत कहां तक पहुंचती है, इस बारे में आने वाले वक्त में बताया जाएगा। सांसद निशिकांत दुबे की अध्यक्षता वाली संचार और सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी संसदीय समिति ने दूरसंचार विभाग से कहा है कि वह दोनों ऑपरेटरों के बीच इंफ्रास्ट्रक्चर शेयरिंग पर फैसला लेने में मदद करे।

5G रोलआउट होगा आसान

समिति ने कहा है कि जिन क्षेत्रों में एक ऑपरेटर की मौजूदगी दूसरे की तुलना में अच्छी है, वहां दोनों के बीच साझेदारी होने से सेवाओं के विस्तार में मदद मिलेगी और दोनों ही कंपनियों के लिए 5जी रोलआउट करना भी आसान और तेज होगा। हालांकि सरकार ने इस बारे में अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा है कि इस बारे में आखिरी फैसला कंपनियों को ही लेना है। यह उनके बीच का मामला है। याद रहे कि वोडा-आइडिया में भी सरकार की 49 फीसदी हिस्सेदारी है। सरकार ने बार-बार कहा है कि वह कंपनी के मैनेजमेंट में कोई दखल नहीं देगी।

स्पेक्ट्रम शेयरिंग से मिलेगा फायदा

जानकारों के अनुसार, दोनों कंपनियां हाथ मिलाती हैं तो वोडा-आइडिया के 900 मेगाहर्त्ज स्पेक्ट्रम से जुड़े 2जी यूजर्स को बीएसएनएल के नेटवर्क पर शिफ्ट किया जा सकता है। इससे वीआई का स्पेक्ट्रम 4G नेटवर्क के लिए खाली हो जाएगा। वहीं, वोडा-आइडिया की ताकत का इस्तेमाल करके बीएसएनएल अपने 700 मेगाहर्त्ज बैंड को 5जी के लिए रेडी कर सकता है।

यह भी पढ़े: निर्यातकों को 497 करोड़ का राहत पैकेज

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