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IAS अफसर की विजिलेंस जांच मंजूर

पूर्व PWD सचिव ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विजिलेंस जांच को मंजूरी, 2 करोड़ रिश्वत मांगने का आरोप

केरलम के पूर्व PWD सचिव ज्ञानेश कुमार पर 2 करोड़ की रिश्वत का आरोप। गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत विजिलेंस जांच की दी मंजूरी।

पूर्व pwd सचिव ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विजिलेंस जांच को मंजूरी 2 करोड़ रिश्वत मांगने का आरोप

Keralam Home Minister Ramesh Chennithala |

नई दिल्ली। केरलम सरकार ने मुख्य चुनाव आयुक्त और केरलम के पूर्व PWD सचिव ज्ञानेश कुमार के खिलाफ भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोपों की सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (Vigilance and Anti-Corruption Bureau) से जांच कराने की आधिकारिक मंजूरी दे दी है। गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने बुधवार को इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि कानूनी सलाह और मुख्यमंत्री के साथ विचार-विमर्श के बाद यह निर्णय लिया गया है।

कानूनी राय के बाद गृह मंत्री ने दिए जांच के आदेश

न्यूज एजेंसी ANI से बातचीत में गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने बताया कि सरकार को प्राप्त कानूनी राय में यह स्पष्ट किया गया था कि राज्य सरकार की पूर्व स्वीकृति मिलने पर ही जांच शुरू की जा सकती है। इसी आधार पर मंगलवार शाम को विजिलेंस ब्यूरो को जांच की अनुमति दी गई। 

गृह मंत्री ने कहा कि फाइल आने के बाद उन्होंने कानूनी पहलुओं की समीक्षा की और मुख्यमंत्री के साथ विस्तृत चर्चा के बाद भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) की धारा 17A के तहत यह मंजूरी दी है।

2 करोड़ रुपये रिश्वत मांगने और प्रोजेक्ट में गड़बड़ी के आरोप

यह पूरा मामला एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) द्वारा वित्तपोषित तिरुवनंतपुरम से अंगमाली तक 'मेन सेंट्रल रोड' परियोजना से जुड़ा है। इस प्रोजेक्ट का निर्माण 'पाटी बेल' (Pati Bell) नाम के कंसोर्टियम ने किया था, जिसमें एक मलेशियाई और एक स्थानीय केरलम की कंपनी शामिल थी।

आरोप है कि ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल के दौरान इस परियोजना का काम ठीक ढंग से नहीं किया गया था। इस दौरान बकाया बिल पास करने के बदले 2 करोड़ रुपये की रिश्वत मांगने का गंभीर आरोप लगा है। 

अधिकारी की खुदकुशी से गरमाया था मामला

चेन्निथला के अनुसार, उस वक्त मलेशियाई कंपनी से जुड़े एक प्रोजेक्ट ऑफिसर ने आत्महत्या कर ली थी। तब यह आरोप सामने आए थे कि PWD द्वारा लंबे समय तक बिलों का भुगतान न किए जाने के कारण तनाव में आकर प्रोजेक्ट ऑफिसर ने यह आत्मघाती कदम उठाया था। 

साजन द्वारा दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि तत्कालीन PWD सचिव ने बिल पास करने के एवज में 2 करोड़ रुपये की मांग की थी। गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि इन गंभीर आरोपों की निष्पक्ष जांच विजिलेंस का दायित्व है और कानून के मुताबिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है।
(इनपुट: ANI)

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