हिमाचल प्रदेश के कसौली में तीन दिवसीय खुशवंत सिंह साहित्य महोत्सव (KSLF) 2026 का रविवार को समापन हो गया।
Khushwant Singh Literary Festival 2026 Concludes with Discussions on Literature, Environment and Military History |
कसौली: हिमाचल प्रदेश के कसौली में तीन दिवसीय खुशवंत सिंह साहित्य महोत्सव (KSLF) 2026 का रविवार को समापन हो गया। देवदार के जंगलों के बीच आयोजित इस महोत्सव में देश-विदेश के प्रतिष्ठित लेखकों, पत्रकारों और विचारकों ने सैन्य इतिहास, कला, उद्यमिता, पर्यावरण और साहित्य जैसे विषयों पर चर्चा की। केएसएलएफ की ओर से साझा की गई प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, महोत्सव के समापन दिवस की शुरुआत संदीप सिंह की संगीत प्रस्तुति के साथ हुई। इसके बाद लेखक प्रोबल दासगुप्ता और प्रख्यात पत्रकार सुनेत्रा चौधरी के बीच 'जनरल सुंदरजी: सेलिब्रेटेड या डिबेटेबल' विषय पर चर्चा हुई।
सतीश गुजराल की विरासत को किया याद
महोत्सव में अमन नाथ और फ़िरोज़ गुजराल के बीच बातचीत के जरिए प्रख्यात कलाकार सतीश गुजराल के जीवन और उनकी विरासत को याद किया गया। उनकी जन्मशताब्दी के अवसर पर आयोजित इस सत्र में पेंटिंग, मूर्तिकला, वास्तुकला और साहित्य के क्षेत्र में उनके योगदान पर चर्चा हुई। इस दौरान उनके विशिष्ट व्यक्तित्व, व्यक्तिगत संबंधों और उनकी जीवन यात्रा को दस्तावेजी रूप देने में खुशवंत सिंह की भूमिका पर भी प्रकाश डाला गया। 'कॉरपोरेट योगी: फ्रॉम स्पीकर टू सीईओ' सत्र में पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित डॉ. अरविंद लाल ने सेरेना जैकब के साथ अपने जीवन के उस दौर पर चर्चा की, जिसने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी। वर्ष 1977 में अपने पिता के निधन के बाद डॉ. लाल को पुणे स्थित सशस्त्र बल चिकित्सा महाविद्यालय (AFMC) में पैथोलॉजी की पढ़ाई छोड़कर दिल्ली लौटना पड़ा। इसके बाद उन्होंने वर्ष 1949 में स्थापित अपनी पारिवारिक प्रयोगशाला की जिम्मेदारी संभाली, जिसे आगे चलकर उन्होंने डॉ. लाल पैथलैब्स के रूप में विकसित किया। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, अपनी पुस्तक 'कॉरपोरेट योगी: माई जर्नी एज ए स्पिरिचुअल सीकर एंड एन एक्सीडेंटल आंत्रप्रेन्योर' के संदर्भ में उन्होंने व्यक्तिगत नुकसान, व्यावसायिक जिम्मेदारी और आध्यात्मिक खोज के बीच संबंधों पर अपने विचार साझा किए।
पर्यावरण और सचेत जीवनशैली पर जोर
'स्लो डाउन। यू मूव टू फास्ट' सत्र में पर्यावरण संबंधी चिंताओं और सचेत जीवनशैली पर चर्चा हुई। इसमें श्रेया जानी ने गर्ग रावत के साथ बातचीत की। वंदना शिवा के साथ सह-लेखक के रूप में लिखी गई अपनी पुस्तक 'स्लो लिविंग: व्हाट यू कैन डू अबाउट क्लाइमेट चेंज' के आधार पर जानी ने बताया कि उपभोक्ताओं की पसंद, विशेषाधिकार और जीवनशैली व्यक्तिगत भलाई के साथ-साथ पर्यावरण को भी प्रभावित करती है। उन्होंने नौ साल की उम्र से सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में अपनी यात्रा शुरू करने और 13 साल की उम्र में अत्यधिक मानसिक व शारीरिक थकान यानी बर्नआउट का अनुभव करने का जिक्र किया। साथ ही, उन्होंने व्यक्तिगत सीमाओं को पहचानने और जीवन के प्रति अधिक सचेत दृष्टिकोण अपनाने के महत्व पर जोर दिया। महोत्सव के साहित्यिक सत्रों में शिनि एंटनी और सत्यजीत सामंत ने 'घोल्स एंड गुड रीड्स' विषय पर चर्चा की। वहीं, 'आफ्टर खुशवंत हार्ट: द डेब्यूटेंट्स' सत्र में देवकी पांडे, शोभा श्रॉफ और डॉ. जतिंदर परवाज ने हिस्सा लिया। इस सत्र का उद्देश्य साहित्य की उभरती हुई आवाजों को सामने लाना था।
द हैप्पीनेस लैब' के साथ हुआ समापन
महोत्सव के समापन सत्र 'द हैप्पीनेस लैब' में अखिल गुप्ता ने लोगों को खुशहाली, व्यक्तिगत भलाई और जीवन जीने के अधिक विचारशील तरीकों पर सोचने के लिए प्रेरित किया। खुशवंत सिंह के बेटे और महोत्सव के निदेशक राहुल सिंह तथा मधुर सिंह ने वक्ताओं और दर्शकों की भागीदारी के लिए आभार व्यक्त किया। तीन दिवसीय महोत्सव का समापन रेणु सिंह के 'बियॉन्ड द लास्ट पेज: केएसएलएफ सॉन्ग टू रिमेंबर' के साथ हुआ। इस आयोजन ने साहित्य, विचारों और विभिन्न समकालीन विषयों पर सार्थक चर्चाओं के लिए एक साझा मंच प्रदान किया।
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