भोपाल। राज्य साइबर पुलिस ने एक ऐसे अंतरराष्ट्रीय गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो भारतीय युवाओं को विदेश में...
एजेंट सक्रिय, थाईलैंड में नौकरी का झांसा उसके बाद म्यांमार में 'साइबर गुलामी'
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भोपाल। राज्य साइबर पुलिस ने एक ऐसे अंतरराष्ट्रीय गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो भारतीय युवाओं को विदेश में ऊंचे वेतन वाली नौकरी का लालच देकर मानव तस्करी (Human Trafficking) के जाल में फँसाता था। इस गिरोह के तार बिहार और उत्तर प्रदेश से जुड़े पाए गए हैं।
ऐसे काम करता था गिरोह
जांच में सामने आया है कि यह गिरोह युवाओं को डेटा एंट्री और आईटी सेक्टर में अच्छी नौकरी के बहाने थाईलैंड भेजता था, लेकिन वहां पहुँचते ही स्थिति बदल जाती थी। थाईलैंड पहुँचने पर युवाओं को सड़क मार्ग से अवैध तरीके से म्यांमार की सीमा में ले जाया जाता था। वहां सशस्त्र विद्रोहियों द्वारा नियंत्रित 'स्कैम कैंपों' में युवाओं को बंधक बनाकर रखा जाता था और उनसे जबरन भारतीय नागरिकों के साथ ही 'साइबर ठगी' कराई जाती थी। मना करने पर पीड़ितों को भूखा रखा जाता था और इलेक्ट्रिक शॉक जैसी अमानवीय यातनाएं दी जाती थीं।
पुलिस तक पहुंचा मामला और गिरफ्तारियां
भोपाल पुलिस ने तकनीकी सर्विलांस और पीड़ितों से मिली जानकारी के आधार पर इस रैकेट के दो मुख्य एजेंटों को दबोचा है। पुलिस ने उत्तर प्रदेश और बिहार में छापेमारी कर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। ये आरोपी स्थानीय स्तर पर युवाओं को ढूंढते थे, उनके पासपोर्ट और वीजा बनवाते थे और उन्हें अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट के हवाले कर देते थे। शुरुआती जांच में इस गिरोह के तार चीन और मलेशिया के मास्टरमाइंडों से जुड़े होने के संकेत मिले हैं।
संदिग्घ विदेशी नौकरी के प्रस्तावों से बचें
पुलिस ने युवाओं को सलाह दी है कि सोशल मीडिया पर मिलने वाले संदिग्ध विदेशी नौकरी के प्रस्तावों से बचें। किसी भी कंपनी में शामिल होने से पहले दूतावास या आधिकारिक चैनलों के माध्यम से उसकी सत्यता की जांच अवश्य करें। साइबर सेल के अधिकारी कहते हैं कि यह एक 'साइबर गुलामी' का जाल है। युवाओं को बंधक बनाकर उनसे ही अपने देश के लोगों को ठगने का काम कराया जा रहा था।
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