मध्य प्रदेश के होनहार जिम्नास्ट और 'गोल्डन बॉय' कहे जाने वाले उजैर अली की दर्दनाक मौत ने प्रदेश के खेल जगत और शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
उज्जैन/भोपाल। मध्य प्रदेश के होनहार जिम्नास्ट और 'गोल्डन बॉय' कहे जाने वाले उजैर अली की दर्दनाक मौत ने प्रदेश के खेल जगत और शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उजैर की मौत के बाद यह खुलासा हुआ है कि नेशनल जिम्नास्टिक टूर्नामेंट में भेजी गई टीम के साथ कोई भी प्रमाणित (सर्टिफाइड) कोच मौजूद नहीं था।
टीम मैनेजर ने स्वीकारा, न था कोई प्रमाणिक कोच
उजैर अली समेत कुल 44 बच्चों का दल नेशनल गेम्स खेलने कोलकाता भेजा गया था, लेकिन उनके साथ भेजे गए कोच और टीम मैनेजर के पास आवश्यक कोचिंग सर्टिफिकेट नहीं थे। खुद टीम मैनेजर ने स्वीकार किया कि "हमारे पास कोई सर्टिफाइड कोच नहीं था।" अभ्यास और प्रतियोगिता के दौरान सही तकनीकी मार्गदर्शन और सुरक्षा इंतजामों की कमी रही। इसी दौरान उजैर की तबीयत बिगड़ी और बाद में उसकी मौत हो गई। इस घटना के बाद खिलाड़ी के परिजनों में आक्रोश है और वे पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
प्रशिक्षित व अनुभवि कोच होते तो हादसा न होता
परिजनों का आरोप है कि यदि बच्चों के साथ प्रशिक्षित और अनुभवी कोच होते, तो शायद उजैर की जान बचाई जा सकती थी। वहीं, इस मामले ने शिक्षा विभाग और खेल विभाग की लापरवाही को भी उजागर कर दिया है।प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। खेल प्रेमियों और खिलाड़ियों ने मांग की है कि भविष्य में किसी भी राष्ट्रीय प्रतियोगिता में खिलाड़ियों को बिना प्रमाणित कोच और चिकित्सकीय व्यवस्था के न भेजा जाए, ताकि ऐसी दुखद घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
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