मध्य प्रदेश में जनगणना की प्रक्रिया 1 मई 2026 से शुरू होने जा रही है। इस बार की जनगणना कई मायनों में ऐतिहासिक होगी, क्योंकि यह पूरी तरह से डिजिटल तकनीक पर आधारित होगी।
भोपाल। मध्य प्रदेश में जनगणना की प्रक्रिया 1 मई 2026 से शुरू होने जा रही है। इस बार की जनगणना कई मायनों में ऐतिहासिक होगी, क्योंकि यह पूरी तरह से डिजिटल तकनीक पर आधारित होगी। शासन ने इसके लिए तैयारी पूरी कर ली है और प्रति 1000 की आबादी पर 1 प्रगणक (Enumerator) नियुक्त किया जाएगा।
तीन चरणों में पूरी होगी प्रक्रिया
इस बार की गणना को व्यवस्थित रखने के लिए इसे तीन मुख्य चरणों में विभाजित किया गया है। सबसे पहले प्रगणक मकानों की सूची तैयार करेंगे और उनके प्रकार की जानकारी लेंगे। इसके बाद परिवारों का विवरण और सदस्यों की संख्या दर्ज की जाएगी। अंतिम चरण में व्यक्तिगत डेटा लिया जाएगा। यह पूरी प्रक्रिया फरवरी 2027 तक पूरी होने की उम्मीद है।
डिजिटल व मोबाइल ऐप का उपयोग
गणना पूरी तरह पेपरलेस होगी, जिससे डेटा रियल-टाइम में पोर्टल पर अपलोड हो सकेगा। घरों की पहचान के लिए 'डिजिटल डॉट' का उपयोग किया जा रहा है, जिससे परिसीमन (Delimitation) प्रक्रिया में आसानी होगी। डिजिटल होने के कारण मानवीय गलतियों की गुंजाइश कम होगी और समुदायों का संतुलित बँटवारा सुनिश्चित हो सकेगा।
प्रशासनिक व्यवस्था और नियुक्तियाँ
जनगणना के कार्य के लिए हर 1000 लोगों पर एक प्रगणक तैनात रहेगा जो घर-घर जाकर जानकारी जुटाएगा। डेटा सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा जाएगा ताकि व्यक्तिगत जानकारी गोपनीय रहे। यह प्रक्रिया न केवल जनसंख्या गिनने के लिए है, बल्कि भविष्य में संसदीय और विधानसभा क्षेत्रों के परिसीमन में भी सहायक सिद्ध होगी। इस डिजिटल बदलाव से यह सुनिश्चित होगा कि कोई भी क्षेत्र या समुदाय गणना से छूटे नहीं और शासन की योजनाओं का लाभ सही लाभार्थियों तक पहुँचे।
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