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ग्रामीणों ने प्रशासन से की वन पट्टे देने की मांग

मध्यप्रदेश : वन पट्टे और खाद के लिए सड़कों पर उतरे आदिवासी

ग्रामीणों ने बताया कि वन अधिकार कानून 2008 के अंतर्गत उनके पास ज़मीन का नक्शा प्रमाण पत्र हैं पर उनके वनाधिकार पट्टे नहीं होने के कारण उन्हें कृषि के लिए डीएपी यूरिया आदि उर्वरक नहीं मिल रही है।

मध्यप्रदेश  वन पट्टे और खाद के लिए सड़कों पर उतरे आदिवासी

बैतूल। भैंसदेही विकासखण्ड क्षेत्र के वनग्राम आमडाना और धामनिया वनग्राम के सैकड़ों आदिवासियों ने बैतूल पहुंचकर वनाधिकार पट्टों और युरिया डीएपी उर्वरक को लेकर जमकर विरोध प्रदर्शन किया। कलेक्ट्रेट पहुंचकर सभी मांगे जल्द पुरी करने को लेकर ज्ञापन सौंपा। 

पीढ़ियों से ग्रामीण वन भूमि पर हैं काबिज 

ग्रामीणों ने बताया कि वन अधिकार कानून 2008 के अंतर्गत उनके पास ज़मीन का नक्शा प्रमाण पत्र हैं पर उनके वनाधिकार पट्टे नहीं होने के कारण उन्हें कृषि के लिए डीएपी यूरिया आदि उर्वरक खाद प्राप्त नहीं हो पा रहा है। वन अधिकार कानून 2006 की धारा 2 (ण) एवं धारा 4 (3) में अन्य परम्परागत वन निवासियों के पास तीन पीढ़ियों से कब्जें का प्रमाण है जिसमें वन अधिकार कानून 2006 के अनुसार ग्राम के पटवारी मानचित्र, खसरा पंजी में दर्ज जमानों के व्यक्तिगत वन अधिकार के दावे मान्य किए गए, दावों का विवरण पटवारी मानचित्र एवं खसरा पंजी में दर्ज किए जाने के संबंध में मध्य प्रदेश शासन राज्य मंत्रालय राजस्व विभाग के पत्र क्रमांक F-2-4/2014/7/261 दिनांक 30 मई 2022 के अनुसार दिए गए हैं! 1959 में लागू भू राजस्व संहिता और उसके अनुसार बनाए गए पटवारी मानचित्र खसरा पंजी अधिकार अभिलेख में दर्ज जमीन से जो ज़मीन पटवारी मानचित्र खसरा पंजी से अलग कर दी गई या खसरा पंजी में वन भूमि दर्ज कर लिया गया है, यह धारा 5 से 9 तक की जांच के लिए लंबित है उन पर दिसंबर 2005 तक काबिज रहे।

ग्रामीणों ने की वन पट्टे देने की मांग 

अनुसूचित जनजाति और परंपरागत वन निवासी नियम 2008 के नियम 11 (के) के अनुसार व्यक्तिगत वनाधिकार का दावा किए जाने का अधिकार है, इसी कानून के तहत अतिक्रमणकारियों के ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदन कर उन्हें वन अधिकार पट्टे वितरण करने की मांग आदिवासियों द्वारा की गई। ताकि सभी किसानों को कृषि कार्य के लिए बीज खाद उपलब्ध हो सके।

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