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​होम-स्टे परियोजना की शुरूआत, 1000 गांव जुड़े

सैलानियों के लिए आकर्षक बनेंगे मप्र के गांव

होम-स्टे परियोजना के माध्यम से शहरी और विदेशी पर्यटक सीधे गांवों में आकर रुक सकेंगे, जिससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आय के नए व स्थायी अवसर पैदा होंगे।

सैलानियों के लिए आकर्षक बनेंगे मप्र के गांव

भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार राज्य के ग्रामीण इलाकों को पर्यटन के बड़े केंद्र (टूरिस्ट हॉटस्पॉट) के रूप में विकसित करने जा रही है। प्रदेश में ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने और ग्रामीणों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य "धऱती आबा" योजना के तहत एक बड़ा फैसला लिया गया है। इसके तहत राज्य के 1000 नए गांवों को होम स्टे योजना से जोड़ा जाएगा।

​ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी चमकेगी-

​इस नई नीति से न केवल मध्य प्रदेश के सुदूर गांवों की सूरत बदलेगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी एक नई मजबूती मिलेगी। होम-स्टे परियोजना के माध्यम से शहरी और विदेशी पर्यटक सीधे गांवों में आकर रुक सकेंगे, जिससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आय के नए व स्थायी अवसर पैदा होंगे।

​जनजातीय इलाकों पर विशेष फोकस

​शासन द्वारा इस परियोजना में जनजातीय (ट्राइबल) क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इससे आदिवासी अंचलों की अनूठी संस्कृति, पारंपरिक जीवनशैली, लोक कला, खान-पान और हस्तशिल्प को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान मिलेगी। पर्यटक यहां आकर प्रकृति के करीब रहने के साथ-साथ जनजातीय परंपराओं को करीब से महसूस कर सकेंगे।

​सीहोर के 'खारी' गांव की तर्ज पर होगा विकास-

सीहोर जिले के 'खारी' गांव में सफलतापूर्वक संचालित हो रहे होम-स्टे मॉडल की तर्ज पर ही अन्य गांवों को भी विकसित किया जाएगा। इन होम-स्टे में पर्यटकों के लिए आरामदायक ठहरने की व्यवस्था के साथ-साथ पारंपरिक ग्रामीण माहौल और चारपाई जैसे ठेठ देसी अनुभव उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

योजना में यह भी लाभ-

ग्रामीणों को अपने ही घर में रहकर कमाई करने का जरिया मिलेगा।स्थानीय लोक नृत्य, संगीत, और हस्तशिल्प को बढ़ावा मिलेगा।पर्यटकों को फाइव-स्टार होटलों से अलग, शुद्ध और सात्विक ग्रामीण परिवेश का अनुभव मिलेगा।मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड लगातार इन ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को आतिथ्य स्वच्छता और स्किल डेवलपमेंट की ट्रेनिंग भी दे रहा है, ताकि आने वाले समय में पर्यटकों को बेहतरीन सुविधाएं मिल सकें।

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