हैदराबाद। देश में माओवादी हिंसा के सबसे बड़े चेहरों में शामिल और प्रतिबंधित संगठन भाकपा (माओवादी) के शीर्ष...
हैदराबाद। देश में माओवादी हिंसा के सबसे बड़े चेहरों में शामिल और प्रतिबंधित संगठन भाकपा (माओवादी) के शीर्ष सैन्य कमांडर थिप्पिरी तिरुपति उर्फ 'देवजी' ने तेलंगाना पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है। इसे माओवादी आंदोलन की कमर तोड़ने वाली एक बड़ी सफलता माना जा रहा है। 63 वर्षीय देवजी पर 1 करोड़ रुपये (कुछ रिपोर्ट्स में 25 लाख) का इनाम घोषित था। वह माओवादी संगठन की सेंट्रल मिलिट्री कमीशन (CMC) के प्रभारी, पोलित ब्यूरो सदस्य और एक प्रमुख रणनीतिकार थे।
देवजी के साथ 16 अन्य नक्सलियों का आत्मसमर्पण
मई 2025 में अंबाला केशव राव (बासवराजू) की मृत्यु के बाद, देवजी को संगठन के संभावित नए महासचिव के रूप में देखा जा रहा था। देवजी के साथ वरिष्ठ नेता मल्ला राजी रेड्डी और लगभग 16 अन्य कैडरों ने भी हथियार डाले हैं।
ऑपरेशन 'कगार' और सरकार की समय सीमा
यह आत्मसमर्पण केंद्र सरकार द्वारा देश से नक्सलवाद को पूरी तरह खत्म करने के लिए तय की गई 31 मार्च, 2026 की समय सीमा से ठीक पहले हुआ है। सुरक्षाबलों द्वारा चलाए जा रहे निरंतर अभियानों और 'सरेंडर एवं पुनर्वास नीति' के बढ़ते प्रभाव के कारण संगठन के शीर्ष नेतृत्व में भारी बिखराव देखा जा रहा है।
देवजी की अहम भूमिका
देवजी का आत्मसमर्पण संगठन के लिए न केवल सैन्य बल्कि रणनीतिक क्षति भी है। तेलंगाना के जगतियाल जिले के मूल निवासी देवजी ने 'पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी' (PLGA) के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि उनके हटने से अब माओवादी संगठन पूरी तरह नेतृत्व विहीन होने की कगार पर है। हाल ही में डीजीपी तेलंगाना बी. शिवधर रेड्डी ने कहा कि "यह आत्मसमर्पण राज्य सरकार की पुनर्वास योजना और सुरक्षा बलों के बढ़ते दबाव का परिणाम है। अब मुख्यधारा में लौटना ही इन कैडरों के लिए एकमात्र विकल्प बचा है।"
यह भी पढ़ें : https://www.primenewsnetwork.in/india/if-the-police-take-any-action-know-what-avimukteshwarananda-said/145290