मध्यप्रदेश के मंदसौर में जवाहरलाल नेहरू विधि महाविद्यालय के छात्रों का फीस वृद्धि के खिलाफ शुरू हुआ धरना सोमवार देर रात तक जारी रहा।
मंदसौर: मध्यप्रदेश के मंदसौर में जवाहरलाल नेहरू विधि महाविद्यालय के छात्रों का फीस वृद्धि के विरोध में शुरू हुआ धरना सोमवार देर रात तक जारी रहा... छात्रों का आरोप है कि बीच सेमेस्टर में उनकी फीस में करीब दोगुनी बढ़ोतरी कर दी गई है, जिससे विद्यार्थियों और उनके परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ आ गया है.
फीस बढ़ोतरी के खिलाफ छात्रों का प्रदर्शन
फीस बढ़ोतरी के विरोध में छात्रों ने पहले कॉलेज प्रशासन के सामने अपनी बात रखी. आवेदन और ज्ञापन के जरिए समस्या से अवगत कराया. लेकिन जब उनकी मांग पर कोई समाधान नहीं हुआ तो छात्रों ने आंदोलन का रास्ता अपनाया. सोमवार सुबह बड़ी संख्या में छात्र कॉलेज गेट के सामने धरने पर बैठ गए...
13 हजार से बढ़ाकर 25 हजार फीस करने का आरोप
छात्रों का कहना है कि प्रवेश के समय उन्हें करीब 13 हजार रुपए फीस बताई गई थी, लेकिन अब फीस बढ़ाकर 25 हजार रुपए कर दी गई है. इसी बढ़ोतरी को लेकर छात्रों में नाराजगी है. छात्रों का कहना है कि बीच सेमेस्टर में अचानक फीस बढ़ाए जाने से कई विद्यार्थियों के सामने पढ़ाई जारी रखने को लेकर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है.
रात में भी कॉलेज गेट पर जारी रहा धरना
प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना है कि उन्होंने पहले शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग प्रशासन तक पहुंचाई, लेकिन जब कोई जिम्मेदार अधिकारी उनकी समस्या सुनने के लिए मौके पर नहीं पहुंचा तो उन्होंने रात में भी कॉलेज गेट के सामने धरना जारी रखा. सोमवार रात की तस्वीरों में छात्र कॉलेज के बाहर धरने पर बैठे नजर आए. छात्रों ने साफ कहा कि जब तक फीस वृद्धि के मामले में समाधान नहीं निकलता, उनका आंदोलन जारी रहेगा.
प्राचार्य बोले- फीस बढ़ाई नहीं, पुरानी फीस बहाल की
वहीं इस मामले में कॉलेज प्राचार्य की ओर से फीस बढ़ाने के आरोप से अलग पक्ष सामने आया है. प्राचार्य डॉ. विनोद पाटीदार के मुताबिक फीस बढ़ाई नहीं गई है, बल्कि वर्ष 2019-20 में निर्धारित 25 हजार रुपए की फीस को दोबारा लागू किया गया है. उनके मुताबिक बाद में फीस रेगुलेटरी कमेटी के स्तर पर फीस कम की गई थी और अब पूर्व निर्धारित फीस को रिस्टोर किया गया है.
दो किस्तों में फीस जमा कराने का फैसला
छात्रों की परेशानी को देखते हुए फीस दो किस्तों में जमा कराने का निर्णय भी लिया गया है. हालांकि छात्र फीस कम करने की अपनी मांग पर अब भी कायम हैं. उनका कहना है कि वर्तमान विद्यार्थियों पर बढ़ी हुई फीस का भार नहीं डाला जाना चाहिए और पुरानी फीस व्यवस्था ही लागू की जानी चाहिए.
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