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मणिपुर में हिंसक झड़पों के खिलाफ राज्यव्यापी बंद, जनजीवन ठप; सुरक्षा कार्रवाई की मांग

मणिपुर में खोंगबाल तंगखुल हमले के विरोध में दो संगठनों के बंद से जनजीवन ठप रहा। हिंसा और झड़पों के बीच सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।

मणिपुर में हिंसक झड़पों के खिलाफ राज्यव्यापी बंद जनजीवन ठप सुरक्षा कार्रवाई की मांग

Houses and shops set on fire following a clash between two communities in Manipur |

इंफाल (मणिपुर)। खोंगबाल तंगखुल इलाके में हुए हमले में तीन मेइतेई लोगों की मौत और कई अन्य के घायल होने के विरोध में मंगलवार को पूरे मणिपुर में जनजीवन ठप रहा। 'नेटिव पीपल्स कमिटी मणिपुर' (NPCM) और 'इरामदम कानबा लुप' (IKAL) द्वारा बुलाए गए इस राज्यव्यापी बंद के कारण पहाड़ी और घाटी दोनों जिलों में आम गतिविधियां पूरी तरह प्रभावित रहीं।

48 घंटे और 32 घंटे का बंद

NPCM ने 48 घंटे के बंद का आह्वान किया है, जबकि IKAL ने 32 घंटे के बंद की घोषणा की है। दोनों की शुरुआत सोमवार आधी रात से हुई। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि हालिया हमलों के लिए जिम्मेदार सशस्त्र समूहों के खिलाफ सरकार निर्णायक और कड़ी सुरक्षा कार्रवाई करे।

राज्य पुलिस के अनुसार, यह बंद ऐसे समय में हुआ है जब पूरे मणिपुर में हिंसा का दौर चल रहा है। सांप्रदायिक झड़पों, IED धमाके और ग्रामीणों पर हुए सशस्त्र हमलों के कारण अब तक चार लोगों की जान जा चुकी है, जबकि केंद्रीय सुरक्षा बल के तीन जवानों समेत कई लोग घायल हुए हैं।

थौबाल में झड़प से भड़की हिंसा

राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADGP) लहरी दोरजी लातू ने सिलसिलेवार घटनाओं की जानकारी दी।

एडीजीपी लातू ने कहा, "यह 18 अक्टूबर और आज हुई कुछ दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं के बारे में है। पहली घटना कल रात लगभग 11:20 बजे हुई। थौबाल पुलिस थाना के अंतर्गत आने वाले खंगाबोक पाली बाजार में एक 'म्यूजिकल नाइट' के दौरान, अज्ञात लोगों द्वारा पथराव किए जाने से दो समुदायों के बीच तनाव पैदा हो गया।"

बाजार, शिक्षण संस्थान और परिवहन ठप

बंद के चलते दुकानें, बाजार, व्यावसायिक प्रतिष्ठान, बैंक, निजी कार्यालय और स्कूल-कॉलेज सहित सभी शिक्षण संस्थान बंद रहे। मनोरंजन स्थल भी ठप रहे, और सरकारी कार्यालयों में कर्मचारियों की उपस्थिति काफी कम दर्ज की गई।

सार्वजनिक और निजी परिवहन सेवाएं लगभग पूरी तरह बंद रहीं। सड़कों पर केवल आवश्यक सेवाओं से जुड़े वाहन, पुलिस और सरकारी गाड़ियां ही नजर आईं। अंतर-राज्यीय परिवहन ठप रहने से देश के अन्य हिस्सों से संपर्क प्रभावित हुआ, हालांकि विमान सेवाएं सामान्य रूप से जारी रहीं।

घाटी में दिखा असरदार विरोध

पहाड़ी और घाटी दोनों क्षेत्रों की मुख्य सड़कें सुनसान रहीं। कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों ने सड़कों के बीच लकड़ी के लट्ठे रख दिए और महिलाएं वाहनों की आवाजाही रोकने के लिए सड़कों पर बैठ गईं। हालांकि, पहाड़ी जिलों की तुलना में घाटी वाले इलाकों में बंद का असर ज्यादा व्यापक रूप से देखा गया।

जरूरी सेवाओं को छूट

मेडिकल इमरजेंसी, स्वास्थ्य सेवाएं, अग्निशमन, जलापूर्ति, मीडिया गतिविधियां और धार्मिक अनुष्ठानों जैसी आवश्यक सेवाओं को बंद से पूरी तरह छूट दी गई थी। किसी भी अप्रिय घटना को टालने के लिए राज्य भर में रणनीतिक स्थानों पर सुरक्षा बलों को भारी संख्या में तैनात किया गया है। रिपोर्ट मिलने तक बंद के दौरान हिंसा की किसी नई घटना की सूचना नहीं है।
​(भाषांतर: Ravi Pandey । इनपुट: ANI)

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