बांग्लादेश से प्रताड़ित होकर आए पश्चिम बंगाल में मतुआ समुदाय के लोगों के पास बांग्लादेश का कोई कागजात नहीं होने पर भी वे सीएए के तहत भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन कर सकते है।
कोलकाता (पश्चिम बंगाल)। केंद्रीय मंत्री शांतनु ठाकुर ने कहा कि बांग्लादेश से प्रताड़ित होकर आए पश्चिम बंगाल में मतुआ समुदाय के लोगों के पास बांग्लादेश का कोई कागजात नहीं होने पर भी वे सीएए (नागरिकता संशोधन कानून) के तहत भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन कर सकते है।
लंबे समय से नागरिकता का इंतजार
केंद्रीय मंत्री शांतनु ठाकुर मतुआ समुदाय के नेता और उत्तर चौबीस परगना जिले के बनगांव लोकसभा क्षेत्र के सांसद हैं। मतुआ समुदाय के अधिकतर लोगों की सबसे बड़ी समस्या उनका भारतीय नागरिक नहीं बन पाना है। भाजपा नेता उन्हें पिछले दस साल से भारतीय नागरिक बनाने का भरोसा देते आए है। सीएए के तहत उन्हें भारतीय नागरिक बनने की प्रक्रिया में तमाम समस्याएं हैं। केंद्रीय मंत्री शांतनु ठाकुर ने बयान से उन्हें भारतीय नागरिक होने की उम्मीद बढ़ी है। पश्चिम बंगाल में उनकी आबादी है।
दस्तावेजों की शर्त बनी परेशानी
केंद्रीय मंत्री शांतनु ठाकुर ने कहा कि सीएए के तहत नागरिकता देने की प्रक्रिया तेजी से पूरी की जा रही है। लेकिन बांग्लादेश के कागजातों की जरूरत होने के मौजूदा प्रावधानों के चलते हिंदू शरणार्थी आवेदन नहीं कर पा रहे हैं क्योंकि उनके पास बांग्लादेश के कागजात नहीं हैं। केंद्र सरकार ने उनकी इस समस्या पर गंभीरता से विचार किया है।
हिंदू शरणार्थी प्रमाण के आधार पर मिलेगी राहत
केंद्रीय मंत्री शांतनु ठाकुर ने कहा कि विभिन्न संगठनों की ओर से बांग्लादेश से आए शरणार्थियों को हिंदू शरणार्थी होने का प्रमाण देने के आधार पर मतुआ समुदाय को सीएए के तहत भारतीय नागरिकता दी जा सकती है। केंद्रीय मंत्री ने मतुआ समुदाय के लोगों को यह भी भरोसा दिया है कि जो वोटर नहीं बन पाएं है या जिनका नाम वोटर लिस्ट से कट गया है, उन्हें बांग्लादेश नहीं भेजा जाएगा।
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