सचिव के.के. सिंह ने भारत के बढ़ते सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम को युवा नवोन्मेषकों के लिए बड़ा अवसर बताया। उन्होंने प्रतिभा को बौद्धिक संपदा और वैश्विक उत्पादों में बदलने पर जोर दिया।
नई दिल्ली: इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के संयुक्त सचिव के.के. सिंह ने सोमवार को कहा कि भारत में एक बढ़ता हुआ सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम है, जो इसकी जनसांख्यिकीय बढ़त, विस्तारित डिजिटल अर्थव्यवस्था और विशाल घरेलू बाजार के साथ मिलकर युवा नवोन्मेषकों और उद्यमियों के लिए अवसर पैदा कर रहा है।
भारत के सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में अपार संभावनाएं
सचिव के.के. सिंह ने नई दिल्ली में STPI इलेक्ट्रोप्रेन्योर समिट में कहा, युवा नवोन्मेषकों और उद्यमियों के लिए, भारत के पास आज असाधारण जनसांख्यिकीय बढ़त, तेजी से विस्तारित डिजिटल अर्थव्यवस्था, एक विशाल घरेलू बाजार और एक बढ़ता हुआ सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम है। उन्होंने कहा कि भारत ने सॉफ्टवेयर और आईटी सेवाओं में वैश्विक नेतृत्व स्थापित कर लिया है, लेकिन बढ़ते इकोसिस्टम के बावजूद इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में अभी काफी प्रगति करनी बाकी है।
प्रतिभा को IP और वैश्विक उत्पादों में बदलना जरूरी
उन्होंने कहा कि देश की तकनीकी यात्रा का अगला चरण सॉफ्टवेयर उद्योग की ताकत और उससे मिली सीख पर आधारित होगा। इसके साथ ही कहा कि देश की तकनीकी यात्रा में सरकारी हस्तक्षेप की भी भूमिका रही है। सिंह ने कहा कि तकनीकी नेतृत्व अंततः प्रतिभा को बौद्धिक संपदा और उत्पादों में बदलने की क्षमता पर निर्भर करेगा। उन्होंने बौद्धिक संपदा को उत्पादों में और उत्पादों को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी कंपनियों में बदलने की आवश्यकता पर जोर दिया।
पेटेंट के व्यावसायीकरण और छोटे शहरों के नवाचार पर जोर
उन्होंने कहा कि पेटेंट दाखिल करने में कई गुना वृद्धि हुई है, लेकिन व्यावसायीकरण के लिए परिवर्तित होने वाले पेटेंटों की संख्या सीमित बनी हुई है। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रोप्रेन्योर 2.0 को ऐसे नवीन विचारों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए जो अंततः व्यावसायीकरण की ओर ले जा सकें।
सिंह ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता टियर-2 और टियर-3 शहरों में आईटी, आईटी-सक्षम सेवाओं और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग का विस्तार करना है। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रोप्रेन्योर कार्यक्रम टियर-2, टियर-3 और टियर-4 शहरों के नवप्रवर्तकों को भी अवसर प्रदान करेगा।
47 करोड़ के इलेक्ट्रोप्रेन्योर 2.0 से ESDM स्टार्टअप्स को मिलेगा बढ़ावा
इलेक्ट्रोप्रेन्योर 2.0 के बारे में सिंह ने कहा कि इस परियोजना का परिव्यय लगभग 47 करोड़ रुपये है, जिसमें से लगभग 17 करोड़ रुपये नीति आयोग से हैं। यह पहल एसटीपीआई, IIIT-D और IESA के संयुक्त प्रयास के साथ-साथ सीएसआर समर्थन से की जा रही है। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम डिजाइन और विनिर्माण (ESDM) में स्टार्टअप्स को सीड फंडिंग, प्री-इनक्यूबेशन, एक्सेलरेशन और एंड-टू-एंड सपोर्ट प्रदान करेगा, जिसमें दूरस्थ टियर-2 और टियर-3 शहरों के नवप्रवर्तकों के लिए विशेष अवसर होंगे।
इलेक्ट्रोप्रेन्योर 2.0 का लक्ष्य 500 स्टार्टअप्स
कार्यक्रम के विवरण के अनुसार, इलेक्ट्रोप्रेन्योर 1.0 ने 59 स्टार्टअप्स को बढ़ावा दिया। 66 पेटेंट दाखिल किए और स्टार्टअप्स का कुल मूल्यांकन 640 करोड़ रुपये से अधिक किया। इलेक्ट्रोप्रेन्योर 2.0 के लिए कार्यक्रम का लक्ष्य 500 स्टार्टअप्स तक पहुंचना है और इस पहल का विस्तार टियर-2 और टियर-3 शहरों तक किया जा रहा है।
स्टार्टअप्स के लिए बेहतर मेंटरशिप और जवाबदेही पर जोर
के.के. सिंह ने मेंटरशिप के महत्व पर भी जोर दिया और कहा कि मेंटर्स को स्टार्टअप्स की विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप नियुक्त किया जाना चाहिए और उनके द्वारा प्रदान किए गए सहयोग के लिए उन्हें जवाबदेह होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार की भूमिका एक मंच तैयार करना और नवप्रवर्तकों को सक्षम बनाना है, जबकि सफलता की अंतिम जिम्मेदारी स्टार्टअप्स पर ही है।
(इनपुट: ANI)
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