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मिडिल ईस्ट संकट से तारकोल महंगा, निर्माण प्रभावित

मिडिल ईस्ट संकट से तारकोल की कीमत में तेजी, सड़क निर्माण पर लग सकता है ब्रेक

लखनऊ। मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध की वजह से सिर्फ पेट्रोलियम उत्पाद और रसोईं गैस ही नहीं, सड़क निर्माण में प्रयुक्त होने वाला प्रमुख कच्चा माल कोलतार (बिटुमिन) की कीमतें भी आसमान छूने लगी हैं।

मिडिल ईस्ट संकट से तारकोल की कीमत में तेजी सड़क निर्माण पर लग सकता है ब्रेक

Bitumen Prices |

लखनऊ। मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध की वजह से सिर्फ पेट्रोलियम उत्पाद और रसोईं गैस ही नहीं, सड़क निर्माण में प्रयुक्त होने वाला प्रमुख कच्चा माल कोलतार (बिटुमिन) की कीमतें भी आसमान छूने लगी हैं। कोलतार की बढ़ती कीमतों की वजह से राज्य में सड़क निर्माण के काम में लगे ठेकेदारों की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं।

होर्मुज़ स्ट्रेट तनाव का असर

होर्मुज़ स्ट्रेट में तनाव और शिपमेंट में देरी से निर्माण सामग्री महंगी हुई है, जिससे सड़क परियोजनाओं में लगे ठेकेदारों की लागत बढ़ गई है और उन्हें काम जारी रखने में मुश्किलें आ रही है। राज्य सरकार पुराने अनुबंधों पर ही ठेकेदारों को काम पूरा करने का दबाव बना रही है। लेकिन बढ़ती लागत को देखते हुए कुछ कंपनियों ने 'फोर्स मेज्योर' लागू कर दिया है, जिसका अर्थ है कि वे अनुबंध के अनुसार आपूर्ति करने में असमर्थ हैं। इस वजह से सड़क निर्माण कार्य धीमा हो सकता है

20 दिनों में डेढ़ गुना बढ़े दाम

बाजार सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार पिछले बीस दिनों के भीतर सड़क निर्माण में उपयोग होने वाले तारकोल की कीमतें करीब एक से डेढ़ गुना बढ़ गई हैं। तारकोल पर 7360 रुपये प्रति टन की महंगाई आने के बाद अब रेट 61953 रुपये प्रति टन के पार पहुंच गया है। पहली बार तारकोल के भाव निर्धारित अवधि के बीच में ही बढ़ाए गए हैं।

बीजी-30 तारकोल के रेट में भारी बढ़ोतरी

सूत्रों के अनुसार फरवरी माह तक तारकोल का रेट 54593 रुपये प्रति टन था। लेकिन अब बढ़कर 61953 तक पहुंच गया है। लोक निर्माण विभाग के एक ठेकेदार ने बताया कि तारकोल कई प्रकार का आता है, लेकिन जो सबसे ज्यादा उपयोग में आता है वह बीजी-30 है। फरवरी में इसका भाव 54593 रुपये प्रति टन था, जो एक मार्च को 300 रुपए की वृद्धि के साथ 54893 रुपये प्रति टन हो गया। इसके बाद पांच मार्च को फिर 2500 रुपए प्रति टन रेट बढ़ा और 16 मार्च को फिर निर्धारित शेड्यूल के तहत 4560 रुपए बढ़ाए गए, जिससे बीजी-30 का भाव 91953 रुपये प्रति टन हो गया है।

ठेकेदारों का मुनाफा घटा

कोलतार महंगा होने के कारण कांट्रेक्टरों का मुनाफा काफी कम हो गया है, लेकिन जो टेंडर लिए हैं, उन्हें कॉन्ट्रैक्ट के मुताबिक पूरा करना ही होगा।

रिफाइनरी से आपूर्ति भी प्रभावित

मथुरा और पानीपत की रिफाइनरी से होने वाली आपूर्ति भी प्रभावित है। आने वाले दिनों में स्थिति और भी गंभीर हो सकती है। अकेले बरेली जिले में ही विभिन्न विभागों के करीब 800 करोड़ के विकास कार्य प्रभावित होने की आशंका है।

पुराने रेट पर टेंडर लेने वालों को नुकसान

इस अनपेक्षित महंगाई का सबसे ज्यादा खामियाजा उन ठेकेदारों को भुगतना पड़ रहा है, जिन्होंने पुराने रेट पर टेंडर लिए थे। अब महंगे दामों पर कोलतार खरीदना घाटे का सौदा साबित हो रहा है। आलम यह है कि अग्रिम भुगतान करने के बावजूद रिफाइनरियों से मांग के अनुरूप माल नहीं मिल पा रहा है।

रोजाना 1000 टन कोलतार की जरूरत

शहर और आसपास के इलाकों में सड़क निर्माण, पेंट उद्योग और अन्य कार्यों के लिए प्रतिदिन करीब एक हजार टन कोलतार की जरूरत होती है। इसका बड़ा हिस्सा सड़कों के निर्माण में उपयोग होता है

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