जिले में प्रशासनिक लापरवाही का एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां 17 वर्षीय नाबालिग छात्र को गलती से वयस्क मान लिया गया, उसे जेल भेज दिया गया।
शहडोल। जिले में प्रशासनिक लापरवाही का एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां 17 वर्षीय नाबालिग छात्र को गलती से वयस्क मान लिया गया, उसे जेल भेज दिया गया। इसके कारण वह मंगलवार को होने वाली अपनी कक्षा 12वीं की अंग्रेजी बोर्ड परीक्षा नहीं दे सका।
मुख्यमंत्री को काला झंडा दिखाने की कोशिश
यह घटना 8 फरवरी की है, जब मुख्यमंत्री मोहन यादव शहडोल जिले के धनपुरी में एक वॉटर पार्क का उद्घाटन करने पहुंचे थे। करीब दोपहर 2 बजे जब मुख्यमंत्री का काफिला गोपालपुर चौराहे से लालपुर हवाई पट्टी की ओर जा रहा था, तभी कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन करते हुए काले झंडे दिखाने की कोशिश की।
कलेक्टर ने प्रदर्शनकारियों को हटाया
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि प्रदर्शन को लेकर उनके पास पहले से कोई सूचना नहीं थी और पर्याप्त पुलिस बल तैनात नहीं होने के कारण स्थिति कुछ समय के लिए काफिले के पास अव्यवस्थित हो गई। इसी दौरान शहडोल कलेक्टर केदार सिंह अपनी गाड़ी से उतरकर बाहर आए और डंडे के जरिए प्रदर्शनकारियों को हटाया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री को काले झंडे दिखाने की कोशिश की थी, जिसे प्रशासन ने खदेड़ दिया।
40 लोग हिरासत में, तीन को जेल भेजा गया
मुख्यमंत्री के रवाना होने के बाद पुलिस ने लगभग 40 कांग्रेस कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया। धारा 151 के तहत सभी को रात करीब 8 बजे बुढार तहसीलदार सुमित कुमार गुर्जर के सामने पेश किया गया। इनमें से 37 लोगों को सशर्त जमानत मिल गई, लेकिन तीन लोगों को जमानत नहीं दी गई, जिनमें यह नाबालिग छात्र भी शामिल था।
कानूनन बड़ी चूक, रात 10 बजे बुढार जेल भेजा
रात करीब 10 बजे तीनों को बुढार जेल भेज दिया गया। बाद में यह सबसे बड़ी चूक सामने आई, क्योंकि कानून के अनुसार किसी नाबालिग को वयस्क जेल में नहीं रखा जा सकता।
परिवार का आरोप: उम्र की जांच नहीं की गई
छात्र के परिवार का कहना है कि यदि अधिकारियों ने हिरासत के समय उसकी उम्र की जांच कर ली होती तो यह स्थिति ही नहीं बनती। परिवार के अनुसार उन्होंने बार-बार दस्तावेज देखकर उम्र सत्यापित करने का आग्रह किया, लेकिन तुरंत कोई कार्रवाई नहीं हुई।
जमानत देने से इनकार
छात्र की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता प्रदीप सिंह ने बताया कि सोमवार को परिवार फिर से तहसीलदार के पास जमानत के लिए पहुंचा, लेकिन स्पष्ट आदेश देने के बजाय मामले को टाल दिया गया। बाद में शाम को अधिकारियों ने संकेत दिया कि एक आरोपी को जमानत दी जा सकती है और बाकी दो पर अगले दिन विचार होगा। जब परिवार ने तीनों की एक साथ जमानत की मांग की तो जमानत देने से इनकार कर दिया गया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर बुढार थाने लाया गया और तहसीलदार के सामने पेश किया गया।
दस्तावेजों से साबित हुआ छात्र नाबालिग था
परिवार द्वारा दस्तावेज पेश करने के बाद यह स्पष्ट हुआ कि छात्र की जन्मतिथि 22 मई 2008 है, जिससे वह कानूनी रूप से नाबालिग साबित हुआ। तहसीलदार ने गलती स्वीकार की और उसी रात जमानत देने पर सहमति जताई, लेकिन औपचारिक प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं हो सकी।
सुबह रिहा हुआ, परीक्षा छूट गई
छात्र को मंगलवार सुबह करीब 7 बजे रिहा किया गया, जब जेल प्रशासन को तहसीलदार का कॉल आया। उसकी बोर्ड परीक्षा सुबह 9 बजे थी, लेकिन रिहाई के बाद घर पहुंचने और परीक्षा केंद्र तक जाने के लिए समय बहुत कम था, इसलिए वह परीक्षा नहीं दे सका।
उम्र सत्यापन की लापरवाही
शहडोल जोन के IG चैत्रा एन ने कहा कि लड़का प्रदर्शनकारी भीड़ में शामिल था और गिरफ्तारी के समय उसकी उम्र स्पष्ट नहीं थी। उन्होंने कहा, "बाद में पुष्टि हुई कि वह 18 साल से कम है। अब मामले में कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।" यह मामला प्रक्रिया में गंभीर चूक, उम्र सत्यापन में लापरवाही और जवाबदेही पर बड़े सवाल खड़े करता है, खासकर तब जब एक बोर्ड परीक्षा दे रहे छात्र का भविष्य दांव पर हो।
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