मध्यप्रदेश सरकार ने सरकारी सेवा ढांचे में व्यापक बदलाव करते हुए चार कैडर को समाप्त करने का निर्णय लिया है। इस फैसले से लगभग डेढ़ लाख कर्मचारियों से जुड़े पद प्रभावित होंगे।
MP government has decided to abolish four cadres from the govt service structure |
भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार ने सरकारी सेवा ढांचे में व्यापक बदलाव करते हुए चार कैडर को समाप्त करने का निर्णय लिया है। इस फैसले से लगभग डेढ़ लाख कर्मचारियों से जुड़े पद प्रभावित होंगे। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि इन कैडर में अब कोई नई भर्ती नहीं की जाएगी।
अब राज्य में रहेंगी केवल तीन प्रकार सेवाएं
कैबिनेट बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार, अब राज्य में केवल नियमित, संविदा और आउटसोर्स सेवाएं ही लागू रहेंगी। दैनिक वेतन, कार्यभारित और अन्य अस्थायी श्रेणियों को धीरे-धीरे समाप्त किया जाएगा। सरकार का कहना है कि इस निर्णय से वर्तमान में कार्यरत कर्मचारियों की नौकरी पर तत्काल कोई खतरा नहीं है। जो कर्मचारी अभी सेवा में हैं, वे अपने पदों पर बने रहेंगे। हालांकि, जैसे-जैसे पद रिक्त होंगे, उन्हें समाप्त मान लिया जाएगा।
ग्रेच्युटी और अनुकंपा नियुक्ति में समानता
सरकार ने दावा किया है कि इस बदलाव से ग्रेच्युटी और अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े मामलों में व्याप्त असमानता खत्म होगी और सभी कर्मचारियों को एक समान लाभ मिल सकेगा। राज्य सरकार का तर्क है कि अलग-अलग कैडर होने से वर्षों से वेतन, पदोन्नति और सेवा शर्तों को लेकर विवाद चल रहे थे। नई व्यवस्था से प्रशासनिक ढांचा सरल होगा और कर्मचारियों के बीच भेदभाव कम होगा। सरकार ने साफ किया है कि इस फैसले से राज्य के खजाने पर कोई अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं पड़ेगा। बल्कि, लंबे समय में वेतन और सेवा प्रबंधन को सुव्यवस्थित करने में मदद मिलेगी।
अब तक विभिन्न विभागों में चार अलग-अलग कैडर के कर्मचारी कार्यरत थे, जिनकी सेवा शर्तें अलग-अलग थीं। इससे कोर्ट मामलों और प्रशासनिक उलझनों की संख्या भी बढ़ रही थी। यह निर्णय राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था में सबसे बड़े सुधारों में से एक माना जा रहा है, जिसका असर आने वाले वर्षों में साफ दिखाई देगा।
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