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किसानों के साथ बैठक में मप्र सरकार का फैसला

किसानों के विरोध के बाद उज्जैन-इंदौर ग्रीनफील्ड कॉरिडोर में अहम बदलाव

मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने किसानों के कड़े विरोध के बाद उज्जैन-इंदौर ग्रीनफील्ड कॉरिडोर परियोजना में महत्वपूर्ण बदलाव करने का निर्णय लिया है।

किसानों के विरोध के बाद उज्जैन-इंदौर ग्रीनफील्ड कॉरिडोर में अहम बदलाव

MP Govt Revises Ujjain-Indore Greenfield Corridor After Farmers’ Protest |

इंदौर। मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने किसानों के कड़े विरोध के बाद उज्जैन-इंदौर ग्रीनफील्ड कॉरिडोर परियोजना में महत्वपूर्ण बदलाव करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और किसान प्रतिनिधियों के बीच भोपाल में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक के बाद यह फैसला लिया गया।

अब जमीनी स्तर पर ही ऊंचाई

कॉरिडोर की ऊंचाई कम होगी। किसानों की सबसे बड़ी मांग यह थी कि कॉरिडोर की ऊंचाई बहुत अधिक होने से उनके खेत दो हिस्सों में बंट रहे थे और आवाजाही में समस्या आ रही थी। अब सरकार ने इस रोड को एलिवेटेड (ऊंचाई पर) बनाने के बजाय जमीन के स्तर (At-grade) पर ही बनाने का निर्णय लिया है। 

अधिग्रहित भूमि की बढ़ेगी मुआवजा राशि

बढ़ा हुआ मुआवजा: मुख्यमंत्री ने किसानों को आश्वस्त किया है कि अधिग्रहित की जाने वाली भूमि के लिए मुआवजे की राशि में बढ़ोतरी की जाएगी। अब किसानों को उनकी जमीन का बाजार भाव के अनुरूप उचित दाम मिलेगा। इसके साथ सर्विस रोड का निर्माण किया जाएगा। स्थानीय किसानों की सुविधा के लिए इस कॉरिडोर के साथ-साथ सर्विस रोड भी बनाई जाएगी, ताकि ग्रामीण और किसान आसानी से आवाजाही कर सकें।

यह फैसला इसलिए

यह कॉरिडोर सिंहस्थ 2028 को ध्यान में रखते हुए बनाया जा रहा है ताकि इंदौर और उज्जैन के बीच यात्रा का समय घटकर मात्र 30-40 मिनट रह जाए। हालांकि, इंदौर और उज्जैन जिले के करीब 28 गांवों के किसान भूमि अधिग्रहण और रोड की ऊंचाई को लेकर लंबे समय से आंदोलन कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा, "सरकार विकास के साथ-साथ किसान हितों को सर्वोपरि रखती है। किसानों की सहमति से ही इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाया जाएगा।"

क्या है योजना

परियोजना की कुल लागत करीब ₹2,000 करोड़ है। इसकी लंबाई करीब 48 किलोमीटर है। इससे इंदौर के 20 और उज्जैन के 8 गांव प्रभावित होंगे। इसका मुख्य उद्देश्य सिंहस्थ 2028 के दौरान यातायात को सुगम बनाना है।

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