मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने प्रशासनिक अनदेखी और न्यायिक आदेशों की अवहेलना पर कड़ा रुख अपनाया है।
इंदौर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने प्रशासनिक अनदेखी और न्यायिक आदेशों की अवहेलना पर कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग के चार वरिष्ठ अधिकारियों (जिसमें एक रिटायर्ड IAS, एक तत्कालीन और दो मौजूदा अफसर शामिल हैं) को अदालत की अवमानना (Contempt of Court) का दोषी ठहराया है और दो-दो महीने के कारावास की सजा सुनाई है। सजा पाने वालों में रिटायर्ड IAS मोहम्मद सुलेमान, तरुण राठी और डॉ. गोविंद चौहान सहित चार अधिकारी शामिल हैं।
क्या है मामला
यह पूरा विवाद स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों के नियमितीकरण (Regularization) से जुड़ा है। कोर्ट ने पहले इन कर्मचारियों के पक्ष में आदेश दिया था, जिसका पालन अधिकारियों ने नहीं किया। जस्टिस प्रणय वर्मा की सिंगल बेंच ने यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि न्यायिक आदेशों की जानबूझकर की गई अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हाईकोर्ट ने सजा के इस आदेश को फिलहाल तीन सप्ताह (21 दिन) के लिए स्थगित रखा है, ताकि दोषी अधिकारी ऊपरी अदालत में अपील कर सकें।
क्या था विवाद
यह मामला एक वार्डबॉय और अन्य स्वास्थ्य कर्मचारियों के नियमितीकरण से संबंधित था। लंबे समय से लंबित इस मामले में हाईकोर्ट ने पहले ही आदेश जारी कर दिए थे, लेकिन विभाग के उच्च अधिकारियों ने इसे लागू करने में टालमटोल की। बार-बार अवसर दिए जाने के बावजूद आदेश का पालन न होने पर इसे "अदालत की अवमानना" माना गया। प्रशासनिक हलकों में इस फैसले के बाद हड़कंप मच गया है क्योंकि यह सीधे तौर पर बड़े नौकरशाहों की जवाबदेही से जुड़ा मामला है।
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