इस बार मध्य प्रदेश में होली का त्यौहार पर्यावरण संरक्षण के एक विशेष संदेश के साथ मनाया जाएगा।
भोपाल। इस बार मध्य प्रदेश में होली का त्यौहार पर्यावरण संरक्षण के एक विशेष संदेश के साथ मनाया जाएगा। राज्य शासन ने पहली बार होलिका दहन के पारंपरिक तरीके में बदलाव करते हुए लकड़ी के स्थान पर 'गो काष्ठ' (गाय के गोबर से बनी लकड़ी) के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए विस्तृत आदेश जारी किए हैं।
पंजीकरण करना होगा अनिवार्य
प्रदेश में पहली बार सार्वजनिक होलिका दहन के लिए पंजीकरण (Registration) अनिवार्य कर दिया गया है। सभी आयोजनों का पंजीकरण तहसील, नगरीय निकाय और पंचायत स्तर पर पूरी तरह से नि:शुल्क किया जाएगा। होलिका दहन के दिन मैदानी अमला (Field Staff) मौके पर जाकर भौतिक सत्यापन करेगा कि वहां वास्तव में गो काष्ठ का उपयोग हुआ है या नहीं। अब गो काष्ठ आधारित होलिका दहन को एक राज्यस्तरीय नीति के रूप में लागू किया गया है।
सम्मान और पुरस्कार
सरकार ने घोषणा की है कि जो संस्थाएं पर्यावरण अनुकूल गो काष्ठ को अपनाएंगी, उन्हें शासन द्वारा सम्मानित किया जाएगा। सत्यापन के आधार पर जिलेवार सूची तैयार की जाएगी और गो काष्ठ का उपयोग करने वाली संस्थाओं को पुरस्कार दिए जाएंगे। इस पहल का मुख्य उद्देश्य पेड़ों की कटाई को रोकना और प्रदूषण कम करना है। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) के एसीएस संजय कुमार शुक्ला ने सभी संभाग आयुक्तों और कलेक्टरों को इस संबंध में निर्देश भेज दिए हैं।
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