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जमीन धंसी, मिला प्राचीन सुरंग का सुराग

रायबरेली में बारिश के बाद खुला रहस्यमयी सुरंग का राज, कुषाण कालीन अवशेष मिलने का दावा

रायबरेली के ओई गांव में जमीन धंसने के बाद मिली प्राचीन कुषाण कालीन सुरंगनुमा संरचना के अवशेष मिले हैं।

रायबरेली में बारिश के बाद खुला रहस्यमयी सुरंग का राज कुषाण कालीन अवशेष मिलने का दावा

Mysterious Tunnel Unearthed in Raebareli, Kushan-Era Relics Found During Probe |

रायबरेली,(उत्तर प्रदेश)। से एक बेहद हैरान करने वाली और ऐतिहासिक खबर सामने आ रही है। यहां के ओई गांव में बारिश के बाद अचानक जमीन धंस गई। जमीन धंसने से वहां एक रहस्यमयी सुरंग और पक्की दीवार जैसी संरचना दिखाई दी है। इस घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है।

खेत मे निकला सुरंग का मुहाना

मामला रायबरेली जिले के हरचंदपुर थाना क्षेत्र का है। यहां स्थित ओई गांव में एक निजी खेत के अंदर बारिश के बाद अचानक एक मीटर चौड़ा गड्ढा हो गया। जब लोगों ने पास जाकर देखा, तो वहां पक्की दीवार से बनी एक प्राचीन सुरंग जैसी आकृति नजर आई। इस अनोखी संरचना को देखने के लिए देखते ही देखते पूरे गांव की भीड़ जमा हो गई।

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की लखनऊ मंडल की टीम मौके पर पहुंची

मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन तुरंत एक्शन में आया। एसडीएम महराजगंज और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी ASI लखनऊ मंडल की टीम मौके पर पहुंची। सहायक पुरातत्वविद डॉ. मनोज कुमार यादव के नेतृत्व में टीम सीढ़ी के सहारे इस रहस्यमयी सुरंग के अंदर उतरी। सुरंग के अंदर जांच के दौरान पुरातत्व विभाग की टीम को कई ऐतिहासिक चीजें मिली हैं। यहां से प्राचीन काल की पुरानी ईंटें, मिट्टी की सुराही और एक हैंडल वाली धूपदानी बरामद की गई है। एक्सपर्ट्स के शुरुआती आकलन के मुताबिक, ये सभी अवशेष कुषाण कालीन बताए जा रहे हैं।

'ओई भीट' पुरातत्व विभाग के अभिलेखों में दर्ज एक ऐतिहासिक स्थल

इतना ही नहीं, जांच के दौरान गांव के ही रहने वाले अशोक प्रताप मौर्य के पास से भी कई प्राचीन अवशेष मिले हैं, जिन्हें वो 1985 से सहेज कर रख रहे हैं। बताया जा रहा है कि यह 'ओई भीट' पुरातत्व विभाग के अभिलेखों में दर्ज एक ऐतिहासिक स्थल है। फिलहाल, सुरक्षा के लिहाज से प्रशासन ने पूरे इलाके को सील कर दिया है। मौके पर भारी पुलिस बल तैनात है और ग्रामीणों को गड्ढे के पास जाने से साफ मना किया गया है। एएसआई की विस्तृत वैज्ञानिक रिपोर्ट आने के बाद ही इस प्राचीन और ऐतिहासिक सुरंग का पूरा सच सामने आ सकेगा।

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